बागी माकपा नेता विश्वासघाती हैं, गलती सुधारने पर पार्टी में वापसी संभव: एम. वी. गोविंदन

बागी माकपा नेता विश्वासघाती हैं, गलती सुधारने पर पार्टी में वापसी संभव: एम. वी. गोविंदन

बागी माकपा नेता विश्वासघाती हैं, गलती सुधारने पर पार्टी में वापसी संभव: एम. वी. गोविंदन
Modified Date: July 5, 2026 / 09:22 pm IST
Published Date: July 5, 2026 9:22 pm IST

त्रिशूर (केरल), पांच जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केरल इकाई के सचिव एम. वी. गोविंदन ने रविवार को कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले पार्टी नेताओं ने अपने ‘‘वर्ग से विश्वासघात’’ किया है और उनकी तभी पार्टी में वापसी हो सकती है, जब वे अपनी गलती स्वीकार कर उसे सुधारें।

गोविंदन पत्रकारों के उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें वरिष्ठ माकपा नेता एम. वी. जयराजन के हालिया बयान का हवाला दिया गया था। जयराजन ने कहा था कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन में पार्टी से गलतियां हुईं और यूडीएफ के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले नेता यदि अपनी गलती सुधार कर लौटते हैं, तो उन्हें फिर से पार्टी में लिया जा सकता है।

माकपा के पूर्व नेता वी. कुन्हीकृष्णन, टी. के. गोविंदन और जी. सुधाकरन ने क्रमशः पय्यानूर, थलिपरंबा और अंबालापुझा विधानसभा क्षेत्रों से यूडीएफ के समर्थन से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।

माकपा के प्रदेश सचिव ने कहा कि पार्टी चुनाव बाद आत्ममंथन के दौरान इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर चुकी है और अब वह इस मुद्दे पर मीडिया के सामने दोबारा चर्चा नहीं करना चाहती।

उन्होंने कहा कि जयराजन की टिप्पणी पार्टी के किसी नए फैसले का संकेत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि कोई अपनी गलती सुधार लेता है, तो उसे वापस लिया जा सकता है। यह सिद्धांत दुनिया में कहीं भी लागू होता है।’’

जब उनसे पूछा गया कि इन बागी नेताओं ने आखिर कौन-सी गलती की थी, तो गोविंदन ने कहा कि उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। सुधाकरन, टी के गोविंदन और कुन्हीकृष्णन का रुख पार्टी के साथ विश्वासघात था। वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा थे, लेकिन उन्होंने पार्टी से विश्वासघात किया और उसे छोड़ दिया।’’

चुनावी हार के बाद पार्टी महासचिव एम. ए. बेबी के नेतृत्व में माकपा के भीतर किसी गुट के उभरने संबंधी खबरों को गोविंदन ने सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह बकवास है।’’ हालांकि उन्होंने इस पर कोई और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इस बीच, एम. वी. जयराजन ने पत्रकारों से कहा कि अतीत में एम. वी. राघवन और के. आर. गौरी अम्मा जैसे कई नेता पार्टी छोड़ने के बाद वापस लौटे थे और यदि वर्तमान बागी नेता अपनी गलती सुधार लें, तो उनके लिए भी वही अवसर उपलब्ध है।

जयराजन ने दावा किया कि बागी नेता बड़ी उम्मीदों के साथ यूडीएफ में गए थे, लेकिन अब वे निराश हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ मोर्चा चुनाव के दौरान किए गए पांच गारंटी समेत अपने वादे पूरे करने में विफल रहा है।

उन्होंने अदाणी समूह द्वारा विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना में अपनी हिस्सेदारी एमएससी को हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि बागी विधायक इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

जयराजन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए थलिपरंबा के विधायक टी. के. गोविंदन ने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का उनका फैसला जनता के जनादेश से सही साबित हुआ है।

पय्यानूर के विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने भी जयराजन की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि माकपा आज तक यह नहीं बता पाई कि उनसे आखिर क्या गलती हुई।

गौरतलब है कि पय्यानूर में माकपा नेताओं पर पार्टी निधि में गड़बड़ी के आरोप लगाने के बाद कुन्हीकृष्णन को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

वहीं, टी. के. गोविंदन ने थलिपरंबा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव इसलिए लड़ा था, क्योंकि उन्होंने माकपा द्वारा राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन की पत्नी पी. के. श्यामला को उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध किया था।

भाषा गोला दिलीप

दिलीप


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