भर्ती घोटाला: उच्चतम न्यायालय ने रांची स्थित संस्थान के पूर्व निदेशक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
भर्ती घोटाला: उच्चतम न्यायालय ने रांची स्थित संस्थान के पूर्व निदेशक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भर्ती घोटाले में बुधवार को झारखंड के रांची जिले के कांके स्थित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) के पूर्व निदेशक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को बेहद गंभीर बताया।
न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए पूर्व निदेशक दया राम को दो सप्ताह के भीतर अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
पीठ ने राम के वकील से कहा, ‘‘आपके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। हम झारखंड उच्च न्यायालय के अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते।’’
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता के खिलाफ लगे आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए, हम याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने के इच्छुक नहीं हैं। अतः, विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।’’
सीआईपी देश के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन आता है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दया राम ने 2000 से जनवरी 2013 तक कांके स्थित सीआईपी में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में और जनवरी 2013 से 14 फरवरी 2021 तक संस्थान के निदेशक के रूप में कार्य किया और अंततः जनवरी 2024 में सेवानिवृत्त हुए।
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी जाती है। यदि ऐसा आवेदन दायर किया जाता है, तो उस पर विधि के अनुसार उसके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।’’
दया राम के वकील ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत कथित अपराध सहित सभी कथित अपराध अधिकतम सात वर्ष की सजा के योग्य हैं, और दस्तावेज जब्त कर लिये गए हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश आरोप उस अवधि से संबंधित नहीं हैं जब याचिकाकर्ता रांची में कांके स्थित सीआईपी के निदेशक के रूप में पदभार संभाल रहे थे और ये आरोप मुख्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में हुई भर्ती में घोटाले से संबंधित हैं।
पीठ ने कहा कि वह कथित तौर पर सह-आरोपी निर्मल्य चक्रवर्ती और नदीम अहमद के साथ मिलीभगत करके अनियमितता करने में शामिल था।
झारखंड उच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जांच किए जा रहे मामले में दया राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
न्यायालय ने कहा कि सीआईपी के निदेशक तरुण कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर दो जनवरी को दया राम (जो उस समय निदेशक प्रोफेसर थे), बासुदेव दास, निर्मल्य चक्रवर्ती (वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी), नदीम अहमद (प्रधान लिपिक) और अन्य के खिलाफ नियमित मामला दर्ज किया गया था।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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