उभयलिंगी लोगों संबंधी विधेयक को सरकार वापस ले या प्रवर समिति के पास भेजे : रेणुका चौधरी

उभयलिंगी लोगों संबंधी विधेयक को सरकार वापस ले या प्रवर समिति के पास भेजे : रेणुका चौधरी

उभयलिंगी लोगों संबंधी विधेयक को सरकार वापस ले या प्रवर समिति के पास भेजे : रेणुका चौधरी
Modified Date: March 25, 2026 / 03:46 pm IST
Published Date: March 25, 2026 3:46 pm IST

( तस्वीर सहित )

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद रेणुका चौधरी ने उभयलिंगी समूह के बारे में सरकार द्वारा लाए गए एक विधेयक को ‘जल्दबाजी में उठाया गया कदम’ करार देते हुए इसे वापस लेने या प्रवर समिति के पास भेजने का सुझाव दिया।

उच्च सदन में उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए रेणुका ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक समिति बनायी थी जिसने केंद्र से उभयलिंगी विधेयक वापस लेने को कहा था। उन्होंने कहा कि इस परामर्शदात्री समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन कर रही थीं।

रेणुका के अनुसार अदालत ने निर्देश दिया था कि इस समिति की बैठक में उसके द्वारा नियुक्त किए गए आठ सदस्यों को भाग लेना था। उन्होंने कहा कि अदालत ने जिन सात सचिवों को इस समिति का पदेन सदस्य बनाया था, उसमें से किसी ने भी इसकी बैठक में भाग नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव को इस समिति का संयोजक बनाया गया था और उन्होंने भी इस समिति की बैठक में भाग नहीं लिया। कांग्रेस सांसद ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया।

रेणुका ने प्रश्न किया कि क्या सरकार ने यह विधेयक लाने से पहले उभयलिंगी समुदाय के सदस्यों के साथ कोई विचार विमर्श किया है? उन्होंने कहा कि इस विधेयक में उभयलिंगी की जो परिभाषा दी गयी है, उसमें उन व्यक्तियों को शामिल नहीं किया गया जिनके जन्म के समय उनका लिंग स्पष्ट नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि क्या अब मेडिकल बोर्ड यह तय करेगा कि व्यक्ति उभयलिंगी है कि नहीं? उन्होंने कहा कि क्या अब जिलाधिकारी यह तय करेगा कि व्यक्ति उभयलिंगी है या नहीं?

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि यह विधेयक सरकार का गुरूर दिखाता है क्योंकि यह मानवता की परीक्षा लेगा। उन्होंने कहा कि आज उभयलिंगी कहां नहीं है, उच्चतम न्यायालय में हैं, पुलिस में हैं, खेलों में हैं और वे पदक जीत रहे हैं, देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

रेणुका ने विधेयक को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि देश में कुल पांच लाख लोग उभयलिंगी हैं और पता नहीं क्यों, सरकार इनके लिए कानून बनाने में इतनी जल्दबाजी कर रही है।

उन्होंने कहा कि अब तो निर्वाचन आयोग ने भी उभयलिंगी लोगों की पहचान कर इनको मतदान का अधिकार दिया है।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि इस वर्ग के जिन लोगों को चुनाव पहचान पत्र, आधार कार्ड और पासपोर्ट जारी किए गये हैं, क्या उनको रद्द किया जाएगा? उन्होंने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने या इसे प्रवर समिति के पास भेजने का सुझाव दिया।

भाषा

माधव मनीषा

मनीषा


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