शोधकर्ताओं को मिस्र के शाही मकबरों में दो हजार साल पुरानी तमिल-ब्राह्मी लिपि के शिलालेख मिले

शोधकर्ताओं को मिस्र के शाही मकबरों में दो हजार साल पुरानी तमिल-ब्राह्मी लिपि के शिलालेख मिले

शोधकर्ताओं को मिस्र के शाही मकबरों में दो हजार साल पुरानी तमिल-ब्राह्मी लिपि के शिलालेख मिले
Modified Date: February 12, 2026 / 04:16 pm IST
Published Date: February 12, 2026 4:16 pm IST

चेन्नई, 12 फरवरी (भाषा) शोधकर्ताओं ने मिस्र में राजाओं की घाटी के उच्च सुरक्षा वाले शाही मकबरों के अंदर 2,000 साल पुराने तमिल-ब्राह्मी शिलालेखों की खोज की है।

स्विट्जरलैंड के विद्वान प्रोफेसर इंगो स्ट्रॉच ने 11 फरवरी को यहां आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तमिल पुरालेख सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान इस संबंध में अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। ये निष्कर्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्राचीन तमिल व्यापारी अन्वेषण और पर्यटन के लिए मिस्र के आंतरिक भागों तक की यात्रा करते थे।

स्विट्जरलैंड के लॉजेन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्ट्रॉच ने पेरिस स्थित फ्रेंच स्कूल ऑफ एशियन स्टडीज की प्रोफेसर शार्लोट श्मिड के साथ मिलकर रामेसेस-षष्टम के मकबरे सहित चट्टानों को काटकर बनाई गई छह कब्रों में तमिल-ब्राह्मी और प्राकृत में लिखे लगभग 30 शिलालेखों का दस्तावेजीकरण किया।

सबसे महत्वपूर्ण खोज ‘सिकई कोर्रान’ (प्राचीन तमिलभाषी व्यापारी के लिए प्रयुक्त) नाम है, जो आठ अलग-अलग स्थानों पर पाया जाता है।

शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि शिलालेख में विशेष रूप से ‘सिकई कोर्रान वरा कांता’ लिखा है, जिसका अनुवाद ‘ सिकई कोर्रानआये और देखे’ गए होता है, जो उसी परिसर में पाए जाने वाले यूनानी पर्यटक भित्तिचित्रों की शैली से मेल खाते हैं।

प्रोफेसर स्ट्रॉच ने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि मिस्र में तमिलों की उपस्थिति के पहले के साक्ष्य बेरेनिके जैसे बंदरगाह शहरों तक ही सीमित थे, लेकिन ये शिलालेख साबित करते हैं कि भारतीय व्यापारी केवल इलाके से गुजरने वाले नाविक भर नहीं थे।

उन्होंने रेखांकित किया कि व्यापारी लंबे समय तक ठहरते थे और उनमें तट से दूर स्थित अंतर्देशीय विरासत स्थलों का दौरा करने की जिज्ञासा होती थी।

प्रोफेसर स्ट्रॉच ने कहा कि ‘सिकई’ नाम का अर्थ है गुच्छा या मुकुट, और कोर्रान नाम का अर्थ है नेता, जो यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति प्रारंभिक ऐतिहासिक काल के व्यापारी संघों में महत्वपूर्ण स्थिति का व्यक्ति था।

तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन राज्य के वित्त और पुरातत्व मंत्री थंगम तेन्नारासु ने किया।

मंत्री ने रेखांकित किया कि शिलालेख समाज का एक प्रामाणिक कालानुक्रमिक रिकॉर्ड प्रदान करते हैं, जो बाद के साहित्यिक कार्यों में अक्सर पाए जाने अनुमानों से मुक्त हैं।

उन्होंने उल्लेख किया कि भारत में प्रलेखित शिलालेखों में से लगभग 30,000 तमिलनाडु में पाए जाते हैं, जो छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर अब तक का एक अटूट इतिहास प्रस्तुत करते हैं।

यह सम्मेलन 14 फरवरी को समाप्त होगा। इस दौरान शिलालेखों पर आधारित प्राचीन जल निकासी, पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों पर एक व्यापक पुस्तक का विमोचन किया जाएगा, जिसमें यह दस्तावेजीकरण किया गया है कि प्रारंभिक समाजों ने सिंचाई और सार्वजनिक संसाधनों का प्रबंधन कैसे किया।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


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