नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ‘समाधान समारोह’ पहल का उद्देश्य लंबित मामलों का मध्यस्थता के जरिए इस तरह समाधान करना है कि दोनों पक्षों को यह महसूस हो कि उनकी जीत हुई है।
उच्चतम न्यायालय के ‘समाधान समारोह’ के तहत मामलों के लंबित रहने की समस्या से निपटने के लिए मध्यस्थता और विवादों के सहमति से समाधान के अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पहल के जरिए पक्षकारों को आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने में मदद की जाती है।
आकाशवाणी के ‘न्यूज ऑन एयर’ को दिये साक्षात्कार में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान वादियों को काफी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है और यह पहल उन्हें आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास है।
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायिक कार्यवाही के दौरान वादियों को काफी तनाव से गुजरना पड़ता है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष अदालत से इस भावना के साथ बाहर निकलें कि दोनों की जीत हुई है।’’
उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान के लिए देशभर में चलाया जा रहा मध्यस्थता आधारित अभियान ‘समाधान समारोह’ 21 अप्रैल को शुरू हुआ था और 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के साथ इसका समापन होगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘हमने उच्चतम न्यायालय में 21 से 23 अगस्त तक ‘समाधान समारोह’ का आयोजन किया है। इस पहल के जरिए हमारा उद्देश्य मध्यस्थता और आपसी सहमति के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या कम करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय इस देश की सर्वोच्च अदालत है और मुझे विश्वास है कि इस पहल के तहत कई मामलों का समाधान हो सकेगा।’’
भाषा जितेंद्र प्रशांत
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