संघ के शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करने, व्यापक जनसंपर्क की योजना : आरएसएस

संघ के शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करने, व्यापक जनसंपर्क की योजना : आरएसएस

संघ के शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करने, व्यापक जनसंपर्क की योजना : आरएसएस
Modified Date: March 13, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: March 13, 2026 6:59 pm IST

(फोटो के साथ)

चंडीगढ़, 13 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह सी. आर. मुकुंद ने शुक्रवार को कहा कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देश में शाखाओं के विस्तार और व्यापक जनसंपर्क के जरिये समाज की सहभागिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

संघ में निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की हरियाणा के समालखा में आयोजित तीन दिवसीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह जानकारी दी।

मुकुंद ने बताया कि जनसंपर्क अभियान के तहत केरल में 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों तक संगठन के स्वयंसेवक पहुंचे।

बैठक का उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के 32 सहयोगी संगठनों के अध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में भाग लेंगे।

मुकुंद ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में ‘गृह संपर्क’ अभियान, हिंदू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, गणमान्य नागरिकों की बैठकें और सामाजिक समरसता कार्यक्रम शामिल हैं।

अपने संबोधन में, मुकुंद ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ अभियान का भी उल्लेख किया। इसके तहत सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था का संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वत्व और स्वावलंबन तथा नागरिक और संवैधानिक कर्तव्यों के पालन पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गृह संपर्क अभियान के तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचा गया है और देश के तीन लाख से अधिक गांवों को कवर किया गया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस सद्भाव गोष्ठी और प्रमुख नागरिक गोष्ठी का समाज में सकारात्मक प्रभाव भी देख रहा है।

मुकुंद ने कहा कि केरल में संघ ने मुस्लिम और ईसाई परिवारों के अलावा वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के घरों तक भी पहुंच बनाई। साथ ही, आदिवासी क्षेत्रों में भी जनसंपर्क कार्यक्रम चलाए गए।

मुकुंद ने बताया कि ‘‘हमारे स्वयंसेवक 55,000 मुस्लिम और 54,000 ईसाई घरों’’ तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने जनसंपर्क अभियान के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों तक भी अपनी पहुंच बनाई।

उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के दो प्रमुख आयाम हैं — एक है संगठनात्मक विस्तार, जिसमें शाखाओं की संख्या बढ़ाने पर ध्यान है, और दूसरा है, समाज के साथ संवाद बढ़ाकर समरसता और सामाजिक परिवर्तन तथा जनजागरण को बढ़ावा देना।

मुकुंद के अनुसार, देशभर में अब तक 36,000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं और आने वाले समय में शहरी, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संघ का प्रयास है कि विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख नागरिकों को समुदाय के नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जोड़ा जाए।

तीन दिवसीय बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और विभिन्न क्षेत्रों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कुल 1,487 कार्यकर्ता इस बैठक में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा संघ से जुड़े 32 सहयोगी संगठनों के अध्यक्ष, महासचिव और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहेंगे।

मुकुंद ने कहा कि सरकार के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। उन्होंने मणिपुर में राजनीतिक स्थिरता आने की भी बात कही।

बांग्लादेश में स्थिति पर उन्होंने कहा कि वहां हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण हैं और संघ वहां की सरकार से हिंदुओं के अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील कर रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की यह कामना है कि यह संकट जल्द समाप्त हो।

भाषा रवि कांत रवि कांत सुभाष

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