न्यायालय ने शब्बीर शाह को लंबी जेल के मद्देनजर जमानत दी, कहा- जल्दी सुनवाई की संभावना क्षीण
न्यायालय ने शब्बीर शाह को लंबी जेल के मद्देनजर जमानत दी, कहा- जल्दी सुनवाई की संभावना क्षीण
नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को आतंकवाद के वित्त-पोषण के मामले में यह कहते हुए जमानत दी है कि यदि मुकदमा समय पर समाप्त होने की संभावना नहीं हो तो निरंतर हिरासत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का कारण बन सकती है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 12 मार्च के अपने आदेश में कहा कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है और 74-वर्षीय शाह लंबी अवधि से हिरासत में रहे हैं। हालांकि पीठ ने शाह पर कड़ी जमानत शर्तें भी लागू की हैं, जिनमें मामले के बारे में मीडिया के समक्ष कोई टिप्पणी न करने का आदेश भी शामिल है।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने शाह को चार जून 2019 को गिरफ्तार किया था।
पीठ ने कहा, ‘‘शाह आठ साल से अधिक समय तक कारावास में रहे हैं। किसी आरोपी की लंबी हिरासत, विशेषकर ऐसी परिस्थितियों में जहां मुकदमे में बहुत कम या कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई हो, जमानत के मामले में निर्णय लेने में एक महत्वपूर्ण कारक है।’’
आदेश में यह रेखांकित किया गया कि यदि मुकदमा समय पर समाप्त होने की संभावना नहीं है, तो निरंतर हिरासत संविधान में प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का कारण बन सकती है।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना और यह देखते हुए कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है तथा अपीलकर्ता की लंबी हिरासत अवधि और उनकी वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए, हम अपीलकर्ता को मुकदमे के लंबित रहने के दौरान जमानत देने के इच्छुक हैं।’’
पीठ ने कहा कि शाह निचली अदालत के समक्ष एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि जमानत पर रहते हुए वह समान प्रकृति का कोई और अपराध नहीं करेंगे और वर्तमान मामले में अपनी भूमिका के बारे में मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’’
आदेश में कहा गया कि यदि शाह ने किसी भी जमानत शर्त का उल्लंघन किया, तो अभियोजन पक्ष उन्हें मिली राहत रद्द करने का अनुरोध कर सकता है।
पीठ ने यह आदेश शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद पारित किया। एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा पेश हुए।
पीठ ने सुनवाई के दौरान मुकदमे में कई विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया और शाह की लंबी हिरासत को भी रेखांकित किया।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश

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