न्यायालय का व्यक्ति की पत्नी की नेपाल आंदोलन के दौरान मौत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार

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न्यायालय का व्यक्ति की पत्नी की नेपाल आंदोलन के दौरान मौत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 09:15 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को गाजियाबाद के एक व्यवसायी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया था। याचिका में कहा गया है कि केंद्र की लापरवाही के कारण पिछले वर्ष नेपाल में हुए जेन-जेड के विरोध प्रदर्शनों के दौरान काठमांडू में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी।

याचिकाकर्ता रामबीर सिंह गोला की वकील ने कहा कि वह याचिका में राहत को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकार के उल्लंघन पर अदालत से ‘घोषणा’ प्राप्त करने और ‘संवेदनशील’ देशों में यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए केंद्र द्वारा उपयुक्त प्रोटोकॉल बनाने की दिशा में आदेश तक सीमित कर रही हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि याचिका ‘विचारणीय’ नहीं है, क्योंकि इसमें विवादित तथ्यों और कानून पर निर्णय करना पड़ेगा और उन्होंने याचिकाकर्ता से अन्य कानूनी उपाय अपनाने को कहा।

गोला के वकील ने तर्क दिया कि याचिका में एक ‘गंभीर मुद्दा’ उठाया गया है और यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि अधिकारियों ने भारतीय नागरिकों की उपेक्षा की।

अदालत ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘इसके लिए क्या आपको नहीं लगता कि सबूत की आवश्यकता है? उच्च न्यायालय द्वारा इन मामलों का फैसला करना पूरी तरह से असंभव है। केवल मौलिक अधिकार के उल्लंघन की घोषणा करना ही पर्याप्त राहत नहीं है। इसके साथ कुछ परिणामी राहत भी मिलनी चाहिए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘जनहित याचिका आपके लिए बेहतर उपाय है। जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली अदालत आपकी शिकायत पर गौर कर सकती है।’’

अदालत के इस मत को देखते हुए याचिकाकर्ता की वकील ने उचित कानूनी कार्यवाही करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ले ली।

अपनी याचिका में गोला ने नौ सितंबर, 2025 को अपनी पत्नी की ‘दुखद और टाली जा सकने वाली’ मृत्यु के लिए केंद्र सरकार और हयात होटल्स से क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 75 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। उन्होंने घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग के गठन की भी मांग की है।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश