न्यायालय ने फर्जी मामलों के खिलाफ जागरूक करने संबंधी याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा

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न्यायालय ने फर्जी मामलों के खिलाफ जागरूक करने संबंधी याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 10:16 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें केंद्र और राज्य के अधिकारियों को सभी सार्वजनिक संस्थानों जैसे पुलिस थानों, अदालत परिसरों और नगर पालिका कार्यालयों में डिस्प्ले बोर्ड लगाकर झूठी शिकायतें दर्ज करने के कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी देने के निर्देश का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर 20 अप्रैल तक उनका जवाब मांगा है।

स्वयं उपस्थित हुए उपाध्याय ने पीठ को बताया कि बलात्कार, छेड़छाड़ या एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत झूठे मामले दर्ज करने में वृद्धि हुई है, क्योंकि ऐसे कृत्यों के खिलाफ कोई कानूनी उपाय नहीं है।

उन्होंने कहा कि झूठे मामलों में वृद्धि हो रही है क्योंकि लोग कानूनी परिणामों से अवगत नहीं हैं, इसलिए पुलिस थानों जैसे सार्वजनिक संस्थानों में डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाने चाहिए, जहां शिकायतकर्ता को मामला झूठा होने की सूरत में परिणामों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘हम पर बोलने की आज़ादी छीनने का आरोप लगेगा, लेकिन हमें इससे डरने की क्या जरूरत है? हमें लोगों को जागरूक करके एक सजग समाज का निर्माण करना होगा।’’

उन्होंने कहा कि ऐसा भी देखने में आया है कि एक प्रभावशाली व्यक्ति भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह करके मामूली विवादों के लिए भी कठोर कानूनों के तहत झूठे मामले दर्ज करवाता है।

भाषा शफीक माधव

माधव