उपास्थान स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगा न्यायालय
उपास्थान स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगा न्यायालय
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 1991 के एक कानून के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर बुधवार को सहमति व्यक्त की। ये प्रावधान किसी उपासना स्थल को वापस पाने या उसे 15 अगस्त, 1947 के पहले के स्वरूप में बदलने को लेकर मुकदमा दायर करने पर रोक लगाते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष जनहित याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने आग्रह किया कि इस मामले में अंतिम सुनवाई की जाए, क्योंकि विचारणीय प्रश्न 12 अक्टूबर, 2022 को ही तय कर दिये गये थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार को याचिका पर 31 अक्टूबर, 2022 तक अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने अभी तक अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम अंतिम सुनवाई की तारीख तय करेंगे।’’ उन्होंने यह भी कहा कि मार्च और अप्रैल में नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दो मामलों की सुनवाई पहले से ही तय है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “देखते हैं। नौ-सदस्यीय पीठ द्वारा सुनवाई किये जाने के बाद हम सुनवाई की तारीखें तय करेंगे।’’
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने इस दलील पर विचार करने से इनकार कर दिया कि राजस्थान की एक दीवानी अदालत को अजमेर दरगाह मामले में प्रभावी आदेश पारित करने से रोका जाए।
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ‘‘अगर वे ऐसे आदेश जारी करते हैं तो हम देखेंगे कि क्या करना है। हमने एक आदेश जारी किया है और वह सभी पर बाध्यकारी है। अगर इसका उल्लंघन करके कोई आदेश जारी करता है तो हमें उसकी पड़ताल करनी होगी और देखना होगा… इसके परिणाम भुगतने होंगे।’’
पीठ ने हालांकि कहा कि यदि नोटिस जारी किए गए हैं और जवाब मांगे गए हैं तो प्रक्रियात्मक आदेशों में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर, 2024 को अगले आदेश तक देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से मस्जिदों और दरगाहों पर दावा करने संबंधी नये मुकदमों पर सुनवाई करने और लंबित मुकदमों में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने 12 अक्टूबर, 2022 को केंद्र से ‘‘उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’’ के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 31 अक्टूबर, 2022 तक हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा था।
भाषा प्रशांत सुरेश
सुरेश

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