स्कूली शिक्षा विभाग की झांकी में दिखी ज्ञान की विरासत की झलक

स्कूली शिक्षा विभाग की झांकी में दिखी ज्ञान की विरासत की झलक

स्कूली शिक्षा विभाग की झांकी में दिखी ज्ञान की विरासत की झलक
Modified Date: January 26, 2026 / 12:05 pm IST
Published Date: January 26, 2026 12:05 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की गणतंत्र दिवस की झांकी में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारत के ज्ञान की विरासत और इसके विकास को दर्शाया गया तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में प्राथमिक शिक्षा को मुख्य आधार के तौर पर चित्रित किया गया।

झांकी के आगे के हिस्से में आर्यभट्ट की एक मूर्ति ‘शून्य’ को और एक ग्लोब पकड़े हुए बच्चों को मुस्कुराते हुए दर्शाया गया, जो वैश्विक ज्ञान में भारत के स्थायी योगदान और भविष्य की पीढ़ियों तक इस विरासत को स्थानांतरित करने का प्रतीक है।

बच्चों के पीछे के शिक्षा नीति, 2020 को दर्शाया गया था।

झांकी में स्वदेशी खिलौनों और बहुभाषी सामग्रियों के माध्यम से आनंददायक, खेल-आधारित, मातृभाषा की मूलभूत शिक्षा पर प्रकाश डाला गया था।

झांकी में उभरते भारत के लिए प्रधानमंत्री स्कूल (पीएम श्री) के गेट को दर्शाया गया है, जिसमें बच्चे पौधे लगा रहे हैं, जो समावेशन, पर्यावरण चेतना का प्रतीक है।

झांकी के मध्य हिस्से में शिक्षा में मार्शल आर्ट, प्रदर्शन कला और खेल के समग्र एकीकरण को दर्शाया गया था। इसमें ‘तख्ती’ से लेकर टैबलेट तक के मूल्यों को भी दर्शाने का प्रयास किया गया।

झांकी के आखिरी हिस्से में ‘विकसित भारत 2047’ का उल्लेख किया गया, जहां स्मार्ट क्लासरूम, और नवोन्मेष केंद्र का प्रदर्शन किया गया।

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा


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