Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri: सिटी मजिस्ट्रेट ने दे दिया इस्तीफा.. बोर्ड में अपने नाम के आगे लिख दिया ‘रिजाइन’.. जानें क्या है वजह
अपने इस्तीफे को लेकर उन्होंने 5 पन्नें का इस्तीफ़ा भी लिखा है। उन्होंने लिखा है, " "उप्र सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा से काम कर रही है। प्रयागराज में शंकराचार्य प्रकरण एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है।"
Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resigns || Image- Sachin Gupta Twitter
बरेली: जिले में पदस्थ सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में यह कदम उठा रहे हैं और प्रयागराज माघ मेले के दौरान मारपीट की घटना से बेहद आहत हैं। (Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resigns) यहाँ पिछले दिनों ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी/शिखा छीनकर उन्हें पीटा गया था। उनके इस्तीफे के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है।
अपने इस्तीफे को लेकर उन्होंने 5 पन्नें का इस्तीफ़ा भी लिखा है। उन्होंने लिखा है, ” “उप्र सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा से काम कर रही है। प्रयागराज में शंकराचार्य प्रकरण एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है। यूजीसी केंद्र सरकार द्वारा हिन्दू समाज को बांटकर उन पर शासन करने की अवधारणा से लागू करना प्रतीत होता है”
यूपी | बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने बोर्ड पर खुद रिजाइन लिख डाला !!
5 पेज के रिजाइन में उन्होंने लिखा– “उप्र सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा से काम कर रही है। प्रयागराज में शंकराचार्य प्रकरण एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है”
“UGC केंद्र सरकार… https://t.co/UPke9OxaH8 pic.twitter.com/ASyVwQZqF8
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) January 26, 2026
क्या है UGC का नया कानून?
गौरतलब है कि, 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला और 2019 में दलित मेडिकल छात्रा पायल ताडवी ने परिसर में जाति आधारित उत्पीड़न का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। (Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resigns) इन घटनाओं के बाद, यूजीसी ने कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए।
ये नियम, जो 13 जनवरी 2026 से लागू हुए है उसे “यूजीसी का काला कानून” कहा जा रहा हैं। इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर #RollbackUGC हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। आलोचकों का तर्क है कि नए नियमों के तहत सामान्य श्रेणी के छात्रों को “संभावित अपराधी” की तरह माना जा रहा है।
क्या है कानून में बड़े बदलाव?
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026 में तीन प्रमुख बदलाव किए गए है।
जातिगत भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा: जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता के आधार पर किया गया कोई भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार, जो शिक्षा में समानता में बाधा डालता है या मानवीय गरिमा का उल्लंघन करता है, अब स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव माना जाएगा। (Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resigns) मसौदे में ऐसी स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का समावेश: अब परिभाषा में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र भी शामिल हैं। पहले ओबीसी को शामिल नहीं किया गया था।
झूठी शिकायतों के लिए दंड हटाना: मसौदे में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के लिए जुर्माने या निलंबन के प्रावधान थे। अंतिम नियमों में इन प्रावधानों को हटा दिया गया है।
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