सामाचार एजेंसी पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार सेतुरमन का निधन

सामाचार एजेंसी पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार सेतुरमन का निधन

सामाचार एजेंसी पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार सेतुरमन का निधन
Modified Date: August 20, 2023 / 09:37 pm IST
Published Date: August 20, 2023 9:37 pm IST

चेन्नई, 20 अगस्त (भाषा) अनुभवी पत्रकार और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व मुख्य समाचार संपादक श्रीनिवास सेतुरमन का संक्षिप्त बीमारी के बाद रविवार को यहां निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

वह 99 वर्ष के थे। उनके परिवार में तीन बेटे और एक बेटी हैं।

सेतुरमन ने 1945 में पीटीआई (तत्कालीन एपीआई) से जुड़ने से पहले 1941 में नागपुर में ‘द हितवाद’ अखबार में संपादकीय सहायक के रूप में पत्रकारिता करियर की शुरुआत की।

नागपुर में रहते हुए उन्होंने वर्धा स्थित सेवाग्राम के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को भी कवर किया। वर्धा उस वक्त महात्मा गांधी का निवास स्थान था।

वर्ष 1954-57 के बीच तत्कालीन बंबई (अब मुंबई) में पीटीआई के सेंट्रल न्यूज डेस्क पर काम करने के दौरान उनमें पत्रकारिता संबंधी दृष्टिकोण की बेहतर समझ विकसित हुई और वह संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और संसदीय व्यवस्थाओं की रिपोर्ट करने के लिए दिल्ली चले गए।

सेतुरमन ने 1986 तक पीटीआई में अपनी सेवा के दौरान अपने करियर के पहले 40 वर्षों में पत्रकारिता, रिपोर्टिंग और स्वतंत्रता के बाद के राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रमों का मूल्यांकन करने में लगभग पूरा जीवन बिताया।

बाद में, उन्होंने 35 वर्षों से अधिक समय तक एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में इस समाचार एजेंसी की सेवा की।

पीटीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रधान संपादक विजय जोशी ने सेतुरमन को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें पत्रकारों की कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘पीटीआई का सौभाग्य था कि सेतुरमन ने दशकों तक समाचार प्रभाग का नेतृत्व किया। सेतुरमन भारत के आर्थिक बदलावों के समय के दौरान व्यावसायिक पत्रकारिता के क्षेत्र की एक प्रमुख हस्ती थे। केंद्रीय बजट को बिजली की गति से समझने की उनकी क्षमता बेजोड़ थी। पीटीआई परिवार उनके निधन से बहुत दुखी है।’’

सेतुरमन 1978-86 के बीच पीटीआई के मुख्य समाचार संपादक और आर्थिक संपादक थे।

पीटीआई में उनके शानदार करियर में नेहरू युग और बाद में 1996-1984 के बीच इंदिरा युग की प्रमुख घटनाओं को कवर करना शामिल है।

घरेलू और वैश्विक विकास के मुद्दों, वित्तीय रुझानों और विकसित और अविकसित देशों के बीच के संवादों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अर्थव्यवस्था पर लिखना उनकी विशेषता थी। उन्होंने युद्ध के बाद के दशकों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सम्मेलनों की एक श्रृंखला पर भी रिपोर्टिंग की।

एक संपादक के रूप में, सेतुरमन ने अधिक आर्थिक और सामाजिक सामग्री के साथ समाचार सेवा के विविधीकरण को बढ़ावा दिया और पीटीआई की अंतरराष्ट्रीय डेटलाइन में पर्याप्त वृद्धि की।

वह मुख्य रूप से नई प्रतिभाओं की भर्ती के प्रबंधन अभियान में शामिल थे और अस्सी के दशक के पूर्वार्द्ध में 100 से अधिक प्रशिक्षु पत्रकारों का चयन किया।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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