NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे, प्रोटेस्ट के दौरान छलके आंसू, देखें भावुक वीडियो

NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे, प्रोटेस्ट के दौरान छलके आंसू, देखें भावुक वीडियो

NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे, प्रोटेस्ट के दौरान छलके आंसू, देखें भावुक वीडियो

NEET Paper Leak Protest | Photo Credit: AI

Modified Date: July 23, 2026 / 03:04 pm IST
Published Date: July 23, 2026 3:01 pm IST
HIGHLIGHTS
  • छात्रों के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे
  • किया मौन आंदोलन
  • सरकार से की बातचीत की अपील

मुंबई: NEET Paper Leak Protest देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) का प्रदर्शन लगातार जारी है। NEET पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। सीजेपी को प्रदर्शन में कई पार्टियों का समर्थन मिल रहा है। इसी बीच अन्ना हजारे ने भी मौन आंदोलन (Anna Hazare Protest) का ऐलान कर दिया है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी का चल रहे विरोध-प्रदर्शन के पक्ष में अन्ना हजारे भी महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मौन आंदोलन शुरू कर दिया है।

NEET Paper Leak Protest इस दौरान छात्रों का दर्द बयां करते हुए अन्ना की आंखों से आंसू छलक पड़े। दिल्ली के छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे का दो घंटे मौन आंदोलन चला। जिसके बाद उन्होंने सरकार से बातचीत की अपील की।

अन्ना हजारे ने पीएम को लिखा पत्र

आपको बता दें कि अन्ना हजारे ने बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने दिल्ली में छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। अपने पत्र में अन्ना ने कहा था कि ‘दिल्ली में विद्यार्थियों के मौजूदा प्रदर्शन के दौरान हिंसा एवं पुलिस कार्रवाई ‘बहुत दुखद’ है तथा लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर होता है। हजारे ने पत्र में यह भी कहा था कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि इससे दूसरे मंत्रियों को जवाबदेही के बारे में एक मज़बूत संदेश जाएगा और शासन में सुधार आएगा।

अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए लिखा कि किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार सत्ता नहीं खोती है। इससे बल्कि अन्य मंत्रियों के बीच एक कड़ा और स्पष्ट संदेश जाता है कि जिम्मेदारी न निभाने पर पद छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों की अंतिम जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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