सात मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट चिकित्सकों को नहीं दे रहे मानदेय : एनएमसी

सात मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट चिकित्सकों को नहीं दे रहे मानदेय : एनएमसी

सात मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट चिकित्सकों को नहीं दे रहे मानदेय : एनएमसी
Modified Date: June 4, 2026 / 04:40 pm IST
Published Date: June 4, 2026 4:40 pm IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि देश के 756 मेडिकल कॉलेजों में से सात कॉलेज इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों को उनका मानदेय नहीं दे रहे हैं। आयोग ने इन संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

एनएमसी की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ को बताया कि 756 स्नातक मेडिकल कॉलेजों में से 573 कॉलेजों में मानदेय के भुगतान को लेकर कोई विवाद नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि 176 मेडिकल कॉलेज हाल ही में स्थापित किए गए हैं।

पीठ ने इस मामले को लेकर कहा, ‘‘एनएमसी की ओर से बताया गया कि सात मेडिकल कॉलेज मानदेय नहीं दे रहे हैं। आयोग ने इन संस्थानों पर जुर्माना लगाने के उद्देश्य से कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और उनके जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।’’

पीठ ने यह भी दर्ज किया कि एक मेडिकल कॉलेज बंद है और वहां कोई इंटर्न नहीं है। इसके अलावा, 562 मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं और वे मानदेय दे रहे हैं। केवल दो मेडिकल कॉलेजों में कोई इंटर्न नहीं है, इसलिए वहां मानदेय भुगतान का सवाल ही नहीं उठता।

अदालत ने अधिवक्ता चारू माथुर को नोडल वकील नियुक्त करते हुए सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने मामले के सार, चार्ट और अन्य दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराएं।

पीठ ने कहा, ‘‘सुविधा के लिए एक संकलन तैयार कर अदालत को उपलब्ध कराया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन मामलों में आगे निर्देश जारी किए जा सकें।’’

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त के लिए निर्धारित की।

उच्चतम न्यायालय चिकित्सा स्नातक अभिषेक यादव और अन्य की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मेडिकल छात्रों को मानदेय दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है।

इससे पहले यह पाया गया था कि सितंबर 2023 के एक आदेश में इंटर्न के लिए 25,000 रुपये प्रति माह का मानदेय अनिवार्य किया गया था। लेकिन, पिछले बैच को इसका भुगतान नहीं किया गया था।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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