शहजाद पूनावाला ने भाजपा से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया, नवीन को दूसरा पत्र लिखा

शहजाद पूनावाला ने भाजपा से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया, नवीन को दूसरा पत्र लिखा

शहजाद पूनावाला ने भाजपा से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया, नवीन को दूसरा पत्र लिखा
Modified Date: August 17, 2026 / 11:58 am IST
Published Date: August 17, 2026 11:58 am IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को कहा कि उन्होंने पार्टी में सभी पदों और इसकी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

पूनावाला ने कहा कि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उनसे इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपना इस्तीफा भी पोस्ट किया जिसमें लिखा था कि उन्होंने 30 जुलाई को नवीन को पत्र लिखकर ‘‘निजी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण’’ भाजपा में सभी पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से ‘‘बिना किसी शर्त के इस्तीफा’’ देने की पेशकश की थी।

नवीन को लिखे पत्र में पूनावाला ने कहा कि इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं करने और उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करने के पार्टी के रुख से वह काफी भावुक हो गए हैं।

पूनावाला ने कहा, ‘‘लेकिन लंबे और गहन विचार-विमर्श के बाद मैंने यह अंतिम निर्णय लिया है कि मैं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद और सक्रिय प्राथमिक सदस्यता की भूमिका से मुक्त किए जाने का आग्रह करना चाहता हूं। पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और कुछ ऐसे लोगों की वजह से, जिनके बारे में मैंने आपको विस्तार से बताया है, मुझे अपने पहले के फैसले पर कायम रहने और उसे दोहराने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’’

पूनावाला ने 31 जुलाई को ‘एक्स’ पर अपना ‘बायो अपडेट’ किया था और उसमें भाजपा का कोई जिक्र नहीं किया था जिससे उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगने लगीं। लेकिन उस समय पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

अपने इस्तीफे को लेकर भाजपा प्रमुख को सोमवार को सौंपे गए अपने नवीनतम पत्र में पूनावाला ने कहा, ‘‘जैसा कि पहले बताया गया है, आपात आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण मैं निजी क्षेत्र में काम करूंगा। लेकिन जहां भी और जिस भी रूप में संभव होगा मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के दृष्टिकोण एवं कार्यों का समर्थन करता रहूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने कहा है कि मैं सिर्फ व्यवस्था से अलग हो रहा हूं, व्यक्ति या विचार से नहीं।’’

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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