शिवराज, रीजीजू ने बाढ़ प्रभावित अरुणाचल को केंद्र के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया

शिवराज, रीजीजू ने बाढ़ प्रभावित अरुणाचल को केंद्र के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया

शिवराज, रीजीजू ने बाढ़ प्रभावित अरुणाचल को केंद्र के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया
Modified Date: July 1, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: July 1, 2026 6:19 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

ईटानगर, एक जुलाई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजे गए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और किरेन रीजीजू ने राज्य को राहत एवं पुनर्वास कार्यों के साथ-साथ बाढ़ से बचाव के दीर्घकालिक उपाय करने में केंद्र के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद पिछले सात दिनों में चार लोगों की मौत हो गई, 21 लोग घायल हो गए और दो लोग लापता हैं, जबकि बड़े पैमाने पर मकानों, सड़कों, पुलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

शिवराज ने रीजीजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ बाढ़ प्रभावित केयी पन्योर जिले का हवाई एवं जमीनी सर्वेक्षण करने के एक दिन बाद कहा कि केंद्र अरुणाचल प्रदेश को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।

अरुणाचल से लोकसभा सदस्य रीजीजू ने प्रभावित लोगों की मदद करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई और बार-बार आने वाली बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया।

रीजीजू ने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है और समय पर राहत, मरम्मत एवं पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगी।

शिवराज और रीजीजू ने कहा कि क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए अस्थायी उपायों के बजाय टिकाऊ इंजीनियरिंग समाधानों की जरूरत है।

शिवराज ने यहां लोकभवन में राज्यपाल केटी परनाइक से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि बाढ़ से उबरने तथा कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अरुणाचल प्रदेश को केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि बैठक में बाढ़ से हुए नुकसान के अलावा सिंचाई, ग्रामीण कनेक्टिविटी, कृषि बुनियादी ढांचा, जैविक खेती, ज्यादा कीमत वाली फसलों की पैदावार, कृषि प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की गई।

उन्होंने बताया कि परनाइक ने शिवराज को बाढ़ से हुए भारी नुकसान के बारे में जानकारी दी और जरूरी बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण तथा लोगों की आजीविका बहाल करने के लिए केंद्र से लगातार सहयोग की मांग की।

बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री खांडू ने कहा, “सिबो कोरोंग नदी उफान पर है, जिसके चलते भारी नुकसान हुआ है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर सिबो कोरोंग नदी घाटी के लिए बाढ़ से बचाव की एक स्थायी योजना तैयार करेगी।

अरुणाचल में केयी पन्योर बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक है, जबकि पूर्वी सियांग, पापुम पारे, क्रा दादी, कुरुंग कुमेय, लोअर सुबनसिरी, कामले, अपर सुबनसिरी, लेपराडा, लोअर सियांग, लोअर दिबांग वैली और अंजॉ में भी बड़े पैमाने पर तबाही मची है।

राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), वायु सेना, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवक युद्धस्तर पर राहत, बचाव एवं निकासी अभियान चला रहे हैं।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, 251 गांवों में लगभग 90,499 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा लोग अपर सियांग जिले के हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हालिया आपदा में जान गंवाने वाले चार लोगों में से एक की मौत 28 जून को अंजॉ जिले के सारती गांव में भूस्खलन के कारण हुई, जबकि तीन अन्य लोग 24 जून को केयी पन्योर जिले के पोसा में अचानक आई बाढ़ की वजह से मारे गए।

अधिकारियों ने बताया कि शिवराज से मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में टिकाऊ और उच्च-मूल्य वाली खेती का एक बड़ा केंद्र बनने की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने, आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा तथा एक विकसित एवं आत्मनिर्भर अरुणाचल का दृष्टिकोण साकार हो सकेगा।

परनाइक ने जैविक खेती के मामले में राज्य को हासिल प्राकृतिक लाभ पर प्रकाश डालते हुए प्रमाणित जैविक खेती क्षेत्रों के लिए समर्थन, प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहन, ज्यादा कीमत वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘ऑर्गेनिक अरुणाचल’ उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए सहयोग मांगा।

राज्यपाल ने आईसीएआर और नाबार्ड जैसे संस्थानों के जरिये अनुसंधान केंद्र स्थापित करने, किसानों को प्रशिक्षण देने और मौसम के हिसाब से खेती के तरीके अपनाने में सहयोग की भी मांग की।

उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के मकसद से कृषि-स्टार्टअप, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों के लिए मजबूत बाजार पहुंच कायम करने की भी वकालत की।

भाषा पारुल माधव

माधव


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