सिद्धरमैया ने केंद्र-राज्य संबंधों पर नये विमर्श के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आह्वान का किया समर्थन

सिद्धरमैया ने केंद्र-राज्य संबंधों पर नये विमर्श के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आह्वान का किया समर्थन

सिद्धरमैया ने केंद्र-राज्य संबंधों पर नये विमर्श के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आह्वान का किया समर्थन
Modified Date: March 3, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: March 3, 2026 8:11 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

बेंगलुरु, तीन मार्च (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को पत्र लिखकर केंद्र-राज्य संबंधों पर एक नए राष्ट्रीय विमर्श के प्रति अपने राज्य का जोरदार समर्थन व्यक्त किया है।

सिद्धरमैया ने कहा कि वह केंद्र सरकार से सभी राज्यों के लिए एक संस्थागत मंच – जैसे कि पुनर्जीवित अंतर-राज्य परिषद – उपलब्ध कराने की अपील करेंगे, ताकि सभी राज्य विचार-विमर्श कर सकें और हमारी संघीय संरचना में संतुलन बहाल कर सकें।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर कहा कि संघवाद कोई राजनीतिक मांग नहीं है – बल्कि यह हमारे संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में, राजकोषीय और विधायी मामलों में बढ़ते केंद्रीकरण ने हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा परिकल्पित नाजुक संतुलन को बिगाड़ दिया है। राज्यों को अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए उनके पास अधिकार और राजकोषीय स्वतंत्रता होनी चाहिए। भारत की ताकत सहकारी संघवाद, संवैधानिक विश्वास और विविधता के सम्मान में निहित है।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्नाटक भारत के लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे को मजबूत करने में रचनात्मक योगदान देने के लिए तत्पर है।

सिद्धरमैया ने स्टालिन को उनके 20 फरवरी, 2026 के पत्र के जवाब में यह चिट्ठी लिखी है। स्टालिन ने सिद्धरमैया को केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का पहला भाग भेजा था।

सिद्धरमैया ने दो मार्च को लिखे अपने पत्र में कहा कि कर्नाटक तमिलनाडु की समिति की रिपोर्ट में व्यक्त की गई कई चिंताओं से सहमत है।

उन्होंने कहा, “हमने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि राजकोषीय संघवाद में अधिकार और उत्तरदायित्व का सामंजस्य होना चाहिए। अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग की भूमिका के सिलसिले में अनुच्छेद 268 से 281 और अनुच्छेद 279ए के तहत जीएसटी ढांचे इस तरह काम नहीं कर सकते कि वे राज्यों की राजकोषीय संप्रभुता को कमजोर करें।”

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश


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