आने वाले वर्षों में नीति निर्माण के लिए ‘एसआईआर’ प्रमुख विषय होगा: रमेश
आने वाले वर्षों में नीति निर्माण के लिए ‘एसआईआर’ प्रमुख विषय होगा: रमेश
कोझिकोड (केरल), 28 मई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि सतत, समावेशी और तीव्र विकास आने वाले वर्षों में नीति निर्माण के लिए प्रमुख विषय होगा, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो।
रमेश ने यहां एमपी वीरेंद्रकुमार स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम में कहा कि देश को अगले 10 से 15 वर्षों में तीन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिन्हें उन्होंने ‘एसआईआर’ नाम दिया, जिसमें ‘एस’ का अर्थ सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट), ‘आई’ का अर्थ समावेशी विकास (इन्क्लूसिव डेवलपमेंट) और ‘आर’ का अर्थ तीव्र विकास (रैपिड डेवलपमेंट) है।
उन्होंने कहा कि ये तीनों ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश को ऐसे आर्थिक विकास की आवश्यकता है जो पर्यावरण के अनुकूल हो, समावेशी हो ताकि लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक, और इतनी तीव्र गति से हो कि हर साल श्रम बाजार में प्रवेश करने वाले 70 से 80 लाख भारतीयों के लिए रोजगार सृजित कर सके।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र या राज्यों में चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, आने वाले वर्षों में प्राथमिकता पर्यावरण को विकास के साथ एकीकृत करना होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा, हमें धन का सृजन करना होगा, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि असमानताएं न बढ़ें। तीसरा, हमें अधिक से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए अर्थव्यवस्था का विस्तार करना होगा।’’
रमेश ने वीरेंद्रकुमार के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के बारे में भी बात की और उनके योगदान को याद किया।
रमेश ने कहा कि उनकी पहली मुलाकात वीरेंद्रकुमार से लगभग 30 साल पहले हुई थी, जब उन्होंने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने कहा कि वीरेंद्रकुमार ने महान समाजवादी परंपरा का प्रतिनिधित्व और उदाहरण प्रस्तुत किया था, जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वीरेंद्रकुमार ने भारत की संस्कृति, धर्म और भाषाओं की विविधता का प्रतिनिधित्व किया था।
रमेश ने कहा कि यह विविधता वर्तमान में खतरे में है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत जैसा बहुधार्मिक, बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय देश कोई और नहीं है।
भाषा देवेंद्र माधव
माधव

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