जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे छह छात्र कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के पक्ष में

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे छह छात्र कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के पक्ष में

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे छह छात्र कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के पक्ष में
Modified Date: July 1, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: July 1, 2026 7:20 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छह छात्र कार्यकर्ताओं के लिए, यह विरोध सिर्फ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद ‘‘गहरे संकट’’ – पेपर लीक, परीक्षा को लेकर अनिश्चितता से लेकर बढ़ती फीस और सरकारी शिक्षा के घटते दायरे तक – के बारे में भी है।

विरोध-प्रदर्शन स्थल पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य मंच से दूर एक अलग मंच पर बैठे, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से जुड़े छह छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बुधवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गई।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी नेहा, जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिश, आइसा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी मनीष, दिल्ली विश्वविद्यालय के आइसा उपाध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा, जेएनयू के बराक छात्रावास के अध्यक्ष ऋषिकेश और अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में पीएचडी शोधार्थी आमीन शामिल हैं।

आइसा ने बताया कि दानिश का रक्त शर्करा का स्तर गिरकर 61 पर आ गया है, जबकि डॉक्टरों ने सेहत की वजह से आमीन और दीपक कुमार वर्मा को अनशन रोकने की सलाह दी थी। इसके बावजूद, छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

नेहा ने भूख हड़ताल में शामिल होने का फ़ैसला इस सोच के साथ लिया कि छात्र मौजूदा विरोध-प्रदर्शन से बहुत पहले से ही इन मुद्दों के लिए लड़ रहे थे।

नेहा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सोनम वांगचुक दो मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं : लद्दाख और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। लेकिन प्रधान के इस्तीफे के लिए हमारा संघर्ष आज शुरू नहीं हुआ है। हम 2021 से ही ये मुद्दे उठा रहे हैं, जब वे शिक्षा मंत्री बने थे और पेपर लीक का सिलसिला शुरू हुआ था।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के छात्र पिछली पीढ़ियों द्वारा बनाए गए अवसरों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऋषिकेश ने कहा कि एक छात्र के तौर पर उनके अपने अनुभव ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ने वाले दबाव को समझने में मदद की।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं। अगर परीक्षा में कुछ गड़बड़ हो जाती है, तो उनका पूरा भविष्य प्रभावित होता है।’’

ऋषिकेश ने यह भी कहा कि पेपर लीक, तकनीकी समस्याओं और अनियमितताओं के कारण छात्रों पर भारी मानसिक दबाव पड़ता है।

आमीन ने बताया कि ‘‘शिक्षा का संकट’’ युवाओं में रोजगार और उनके भविष्य को लेकर फैली व्यापक चिंता से जुड़ा है।

मनीष ने कहा कि उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया क्योंकि उनका मानना है कि छात्र और त्रासदियों का इंतजार नहीं कर सकते।

इन छह लोगों में सबसे कम उम्र के, 21 वर्षीय दीपक कुमार वर्मा ने कहा कि उनकी चिंताएं सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा नीति की व्यापक दिशा को लेकर भी चिंतित हैं।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘शिक्षा व्यवस्था खोखली हो गई है। विश्वविद्यालयों का निजीकरण हो रहा है और शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है।’’

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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