सोहराबुद्दीन केस में 13 साल बाद फैसला, सबूत के अभाव में सभी आरोपी बरी

सोहराबुद्दीन केस में 13 साल बाद फैसला, सबूत के अभाव में सभी आरोपी बरी

सोहराबुद्दीन केस में 13 साल बाद फैसला, सबूत के अभाव में सभी आरोपी बरी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:33 pm IST
Published Date: December 21, 2018 8:05 am IST

नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन केस में 13 साल बाद फैसला आया है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अपने फैसले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि सोहराबुद्दीन केस में किसी तरह की साजिश की बात की पुष्टि नहीं हुई है।

साल 2005 के इस मामले में 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज है और ये मुकदमे का सामना कर रहे थे, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं। इस मामले पर विशेष निगाह रही है क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरोपियों में शामिल थे। हालांकि, उन्हें 2014 में आरोप मुक्त कर दिया गया था। अमित शाह इन घटनाओं के वक्त गुजरात के गृह मंत्री थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए।

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कोर्ट ने सीबीआई के आरोपपत्र में नामजद 38 लोगों में 16 को सबूत के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया है। इनमें अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पी सी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं। आऱोपियों के खिलाफ कोई चार्ज सिद्ध नहीं हो पाया। सोहराबुद्दीन हत्या मामले में कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने हुई है लेकिन गोली 22 में से किस आरोपी ने चलाई थी यह साबित नहीं हुआ।

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गौरतलब है कि गुजरात एटीएस और राजस्थान एसटीएफ ने अहमदाबाद के नजदीक एनकाउंटर में मध्य प्रदेश के अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को मार गिराया था। इसके एक साल बाद सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को भी एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था। 2010 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रहा था।

सीबीआइ के मुताबिक, आतंकियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगेस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस समय अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की दरम्यिान रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे। सीबीआइ के मुताबिक, शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई। उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया।


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