‘वंदे मातरम्’ विवाद को लेकर सोनिया गांधी माफी मांगें : बंकिम चंद्र के वंशज सुमित्रो चटर्जी

‘वंदे मातरम्’ विवाद को लेकर सोनिया गांधी माफी मांगें : बंकिम चंद्र के वंशज सुमित्रो चटर्जी

‘वंदे मातरम्’ विवाद को लेकर सोनिया गांधी माफी मांगें : बंकिम चंद्र के वंशज सुमित्रो चटर्जी
Modified Date: August 16, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: August 16, 2026 3:22 pm IST

कोलकाता, 16 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम्’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें।

चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई और इसे रोकने के बार-बार प्रयास किए गए।

चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना ‘‘न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।’’

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर ‘‘गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश’’ व्यक्त किया।

चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को ‘‘देशभक्ति के धर्म’’ की दीक्षा दी थी और कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था, बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी विद्यार्थियों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘‘कथित दोहरी नीति’’ नयी नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे ‘‘झुक गई’’ थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई ‘छात्र परिषद’ जब ‘‘मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम्’’ नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के रक्त एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है।

उन्होंने चेतावनी दी कि ‘‘इतिहास किसी को माफ नहीं करता’’ और जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास ‘‘गुमनामी के अंधकार’’ में धकेल देगा।

चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से आत्ममंथन करने और देशवासियों, विशेषकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की।

भाषा

सिम्मी दिलीप

दिलीप


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