केदारनाथ सहित यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए एसओपी जारी

केदारनाथ सहित यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए एसओपी जारी

केदारनाथ सहित यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए एसओपी जारी
Modified Date: May 27, 2026 / 10:18 pm IST
Published Date: May 27, 2026 10:18 pm IST

देहरादून, 27 मई (भाषा) उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को केदारनाथ और यमुनोत्री समेत कठिन चढ़ाई वाले धार्मिक स्थानों तक पहुंचने के लिए उपयोग किए जाने वाले घोड़े-खच्चरों के संचालन के लिए नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जिसके तहत यात्रा मार्गों पर उनकी संख्या सीमित करने के साथ ही उनका पंजीकरण अनिवार्य किया गया है ।

केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब एवं आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर अश्ववंशीय पशुओं के संचालन के लिए जारी की गयी यह एसओपी तत्काल प्रभाव से लागू होगी ।

अपर सचिव, संतोष बडोनी द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक, नई एसओपी में उत्तराखंड उच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुरूप यात्रा मार्गों की वहन क्षमता निर्धारित की गई है ।

इसके तहत, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000, हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर 1050 तथा यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर करीब 595 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी।

एसओपी में यात्रा मार्गों पर संचालित होने वाले सभी अश्ववंशीय पशुओं का पंजीकरण तथा उससे पूर्व उनका स्वास्थ्य परीक्षण, ‘ग्लैंडर्स’ जांच, ‘इयर टैगिंग’ एवं ‘माइक्रोचिपिंग’ अनिवार्य की गयी है । स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन की होगी, जिसके बाद पुनः परीक्षण आवश्यक होगा। पशुओं का वार्षिक पंजीकरण संबंधित जिला पंचायत तथा जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा ।

एसओपी के मुताबिक, हरेक किलोमीटर पर पशु मालिक को स्वच्छ एवं गुनगुने पेयजल तथा चारा एवं इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पशुओं को घाव तथा अन्य शारीरिक चोटों से बचाने के लिए हल्की एवं वाटरप्रूफ काठियों का उपयोग करने को कहा गया है जबकि निगरानी हेतु संवेदनशील स्थानों के समीप सीसीटीवी कैमरों की स्थापना की जाएगी । इसके लिये प्रत्येक जिले में अधिकारी एवं पशु चिकित्सक नामित किये जायेंगे।

नई एसओपी में पशुओं पर अधिक भार लादने, घायल अथवा बीमार पशुओं से कार्य लेने, बिना टोकन संचालन, पशुओं को पीटने, तेज गति से दौड़ाने तथा ‘ईयर टैग’ अथवा ‘माइक्रोचिप’ से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है ।

एसओपी के मुताबिक, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 एवं भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर संबंधित पशु मालिक का लाइसेंस निरस्त कर उसे काली सूची में डाला जाएगा तथा प्राथमिकी दर्ज की जाएगी ।

यात्रा अवधि में प्रत्येक पशु के साथ संचालक (हॉकर) की उपस्थिति अनिवार्य होगी । एक पशु मालिक अधिकतम दो अश्ववंशीय पशुओं का संचालन कर सकेगा ।

एसओपी के अनुसार, सूर्यास्त के बाद तथा सूर्योदय से पूर्व अश्ववंशीय पशुओं का संचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। खराब मौसम, वर्षा, ओलावृष्टि अथवा बर्फबारी की स्थिति में पशुओं का संचालन रोक दिया जाएगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत ‘म्यूल टास्क फोर्स’ का गठन, अतिरिक्त चेक पोस्टों की स्थापना, रात्रि गश्त, डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली तथा नियमित निगरानी तंत्र को भी अनिवार्य किया गया है ।

भाषा दीप्ति राजकुमार

राजकुमार


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