दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने के लिए प्रस्ताव लाए : शिवकुमार

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दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने के लिए प्रस्ताव लाए : शिवकुमार

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 05:55 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 05:55 PM IST

चेन्नई, 20 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया, जिसमें केंद्र सरकार से परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार मानने, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा सीटों की संख्या 543 बनाए रखने और महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों के तहत ही लागू करने की मांग की गई हो।

शिवकुमार ने अंतर-राज्यीय नदी विवादों का भी जिक्र किया और कहा कि “पानी हमारे बीच विभाजन का कारण नहीं बनना चाहिए।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने हैं।

चेन्नई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में शिवकुमार के अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू शामिल हुए।

शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों के लिए अधिक वित्तीय और राजनीतिक समानता की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा, “उन राज्यों के लिए धन के आवंटन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान के मामले में निष्पक्ष रवैया अपनाया जाना चाहिए, जो देश की अर्थव्यवस्था को गति देते हैं।”

शिवकुमार ने दक्षिण भारत को “भारतीय अर्थव्यवस्था का इंजन” बताया। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में करीब 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी के बावजूद दक्षिण के पांच राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 33 फीसदी का योगदान देते हैं।

शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण में मिली सफलता उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने की वजह नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम इस आश्वासन का स्वागत करते हैं कि किसी भी दक्षिणी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। लेकिन प्रतिनिधित्व का मतलब सिर्फ संख्या नहीं है। यह अहमियत और आवाज के बारे में भी है।”

शिवकुमार ने परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार मानने और लोकसभा सीटों की संख्या में कोई फेरबदल न करने पर खास तौर पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि यहां मौजूद सभी मुख्यमंत्री मेरी बात का समर्थन करेंगे। 1971 के आधार का सम्मान किया जाए और हमारे राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा की जाए।”

शिवकुमार ने परिसीमन के मुद्दे को महिला आरक्षण से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, “महिलाओं ने अपने उचित प्रतिनिधित्व के लिए बहुत लंबा इंतजार किया है। उनके आरक्षण के लिए जनगणना का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।”

उन्होंने परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने की अपील की, जिसमें अगले 25 वर्षों तक लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 पर ही बनाए रखने और उन्हीं 543 सीटों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग की गई हो।

शिवकुमार की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब दक्षिण भारतीय राज्य यह चिंता जता रहे हैं कि आबादी के आधार पर होने वाली परिसीमन की प्रक्रिया से जनसंख्या को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने वाले राज्यों और बड़ी आबादी वाले प्रदेशों के बीच संसदीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना न सिर्फ कर्नाटक, बल्कि तमिलनाडु के लिए भी अहम है।

शिवकुमार ने कहा कि कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पलार जैसी नदियां दक्षिणी प्रायद्वीप की जीवनरेखा हैं। उन्होंने “पानी के बंटवारे से जल सहयोग” की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

शिवकुमार ने कहा, “हमारी नदियां राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानतीं।”

उन्होंने कहा, “पानी हमें एकजुट करे, न कि बांटे। अब पानी के बंटवारे से आगे बढ़कर जल सहयोग की बात करने का समय आ गया है। कर्नाटक ने दिखाया है कि ऐसा सहयोग कैसा होता है।”

शिवकुमार ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच 25 जून को हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि इन तीनों राज्यों ने दिखा दिया है कि राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को बातचीत के जरिये सुलझाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि नदी के किनारे बसे हर राज्य की वैध जरूरतें हैं। और हमारा रुख तीन सिद्धांतों पर टिका है : समानता, पारदर्शिता और सहयोग।”

शिवकुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री से अपर भद्रा परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से घोषित 5,300 करोड़ रुपये जारी किए जाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राशि जारी करने में हो रही देरी से परियोजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।

शिवकुमार ने कहा, “वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) ने (बसवराज) बोम्मई सरकार के समय केंद्रीय बजट में अपर भद्रा परियोजना के लिए 5,300 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। संसद में घोषणा के बावजूद यह राशि अभी तक जारी नहीं की गई है, जिससे परियोजना पर असर पड़ा है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया राशि जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।”

उन्होंने निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) निधि के इस्तेमाल के तरीके को लेकर भी चिंता जताई।

अपर भद्रा परियोजना मध्य कर्नाटक में लागू की जाने वाली एक प्रमुख लिफ्ट सिंचाई योजना है। इसके तहत पहले चरण में तुंगा नदी से 17.40 टीएमसी पानी भद्रा नदी तक पहुंचाने की योजना है, जिसके बाद भद्रा नदी से 29.90 टीएमसी पानी कृष्णा नदी घाटी की तुंगभद्रा उप नदी घाटी में अज्जमपुरा के पास स्थित एक सुरंग तक पहुंचाया जाएगा।

अपर भद्रा परियोजना का मकसद चिक्कमगलुरु, चित्रदुर्ग, तुमकुरु और दावणगेरे जैसे सूखे की आशंका वाले जिलों में 2,25,515 हेक्टेयर जमीन पर सूक्ष्म सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है।

भाषा पारुल नरेश

नरेश