सीमावर्ती आबादी से जुड़ने की अपनी मूल भूमिका भी निभाए एसएसबी : गृह सचिव
सीमावर्ती आबादी से जुड़ने की अपनी मूल भूमिका भी निभाए एसएसबी : गृह सचिव
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने मंगलवार को कहा कि नेपाल और भूटान से लगी भारत की खुली सीमाओं की रक्षा करने वाले सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को इन इलाकों में सुरक्षा मजबूत करने के लिए स्थानीय लोगों से जुड़ने की अपनी ‘‘मूल भूमिका’’ भी निभानी चाहिए।
मोहन एसएसबी के एक अलंकरण समारोह में शामिल हुए जिसमें बल के 18 कर्मियों को वीरता और विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किए गए।
मोहन ने इस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एसएसबी का गठन 1961-62 के दौरान किया गया था और शुरुआती वर्षों में यह सीमावर्ती आबादी के साथ मिलकर काम करता था, लोगों को जागरूक करता था और खुफिया सूचनाएं जुटाता था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने देखा कि नेपाल और भूटान जैसे मित्र देशों से लगी भारत की खुली सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी को सौंपे जाने के बाद उसकी यह भूमिका कुछ हद तक कम हो गई। गृह मंत्रालय का मानना है कि सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ एसएसबी को अपनी मूल भूमिका को भी निभाना चाहिए।’’
उन्होंने चेहरे की पहचान करने वाली प्रौद्योगिकी, रडार और ड्रोन जैसे आधुनिक साधनों की मदद से दोनों सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए बल की सराहना की।
मोहन ने कहा कि एसएसबी इन सीमाओं पर मानव तस्करी और मादक पदार्थों एवं हथियारों की तस्करी रोकने के लिए ‘‘कड़ी नजर’’ रखता है और उसने इन सीमाओं को सुरक्षित रखा है।
एसएसबी भारत-भूटान की 699 किलोमीटर लंबी एवं भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी खुली और बिना बाड़ वाली सीमा की सुरक्षा करता है।
भाषा सिम्मी वैभव
वैभव

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