नशीले पदार्थों और हर तरह के मादक द्रव्यों के सेवन से दूर रहें : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
नशीले पदार्थों और हर तरह के मादक द्रव्यों के सेवन से दूर रहें : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
चेन्नई, 16 अगस्त (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को छात्रों से मादक पदार्थों और हर तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने का आग्रह किया तथा उनसे “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनने का आह्वान किया।
तमिलनाडु में मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण हाल में एक छात्र की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दुखद घटना उन्हें अपने परिवार के किसी सदस्य को खोने जैसी लगी।
उन्होंने कहा, “मैं आप सभी (छात्रों) से आग्रह करता हूं कि हमेशा नशीले पदार्थों और हर तरह के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहें। हमें किसी बाहरी ताकत के नियंत्रण में नहीं आना चाहिए, बल्कि अपने मन को स्वयं नियंत्रित करना चाहिए… हमें नशीले पदार्थों को ना कहना चाहिए।”
यहां के निकट एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 आईआईआईटी, आठ केंद्रीय विश्वविद्यालय, आठ आईआईएम, सात आईआईटी, दो आईआईएसईआर, एक एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा, “आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र संस्थान हैं।”
उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गया है, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक हासिल करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या स्वागत योग्य है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 100 से अधिक देशों को कोरोना वायरस के टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता को व्यावसायिक बनाने की कोशिश नहीं की।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देशभर में एम्स उपलब्ध होने चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके। राधाकृष्णन ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, खासकर युवा हैं।
स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “भविष्य के लिए खुद को तैयार भर न करें, बल्कि भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।”
स्नातकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके ज्ञान, नवाचार और कड़ी मेहनत से भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान होना चाहिए।
उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत

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