छात्र समूहों ने यूजीसी-नेट की दोबारा परीक्षा का विरोध किया, एनटीए की जवाबदेही की मांग
छात्र समूहों ने यूजीसी-नेट की दोबारा परीक्षा का विरोध किया, एनटीए की जवाबदेही की मांग
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) कई छात्र संगठनों ने सोमवार को यहां प्रदर्शन किया और तीन विषयों के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा कराने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया। उनका आरोप है कि बार-बार हुई गड़बड़ियों से छात्रों की पढ़ाई और करियर की योजनाएं खतरे में पड़ गई हैं।
ये विरोध-प्रदर्शन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर एनटीए की लगातार हो रही आलोचना के बीच हो रहे हैं।
एनटीए ने उन उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया है जिन्होंने इस साल जून में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षा दी थी। एक विशेषज्ञ समिति को प्रश्न-पत्रों में तथ्यों, टाइपिंग, अनुवाद और भाषा से जुड़ी कई गलतियां मिली थीं।
दोबारा परीक्षाएं नौ और 10 सितंबर को होंगी और उम्मीदवारों को कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा।
दोबारा परीक्षा कराने के फ़ैसले की कई छात्र संगठनों ने आलोचना की है, जिनमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) शामिल हैं। इन संगठनों ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और मांग की है कि एनटीए को खत्म किया जाए या परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध आइसा ने सोमवार को ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एनटीए मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और एनटीए को खत्म करने की मांग की। उनका आरोप था कि तीन परीक्षा रद्द होना परीक्षा एजेंसी की एक और नाकामी है।
माकपा से संबद्ध एसएफआई ने एक बयान में कहा कि एनटीए के ताजा फैसले ने एक बार फिर निष्पक्ष और त्रुटि-मुक्त परीक्षा आयोजित करने में उसकी विफलता को उजागर कर दिया है।
संगठन ने मांग की कि एनटीए को खत्म कर दिया जाए और उसकी जगह एक पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लाई जाए।
ये विरोध प्रदर्शन, कथित नीट पेपर लीक को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक महीने से भी कम समय बाद हो रहे हैं।
एसएफआई ने एजेंसी की बार-बार परीक्षा में विफलता और खराब यूजीसी-नेट प्रश्नपत्र से जुड़े हालात की न्यायिक जांच की भी मांग की।
केवाईएस ने एनटीए को तुरंत भंग करने की मांग की। उसने एनटीए के कथित “घोटालों” की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की और परीक्षा से जुड़ी अवसंरचना के निजीकरण का विरोध किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी दोबारा परीक्षा कराए जाने पर चिंता जताई और कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियों ने परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि एनटीए की गलतियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए और उन्होंने प्रश्न-पत्र तैयार करने और परीक्षा के प्रबंधन के हर चरण में जवाबदेही तय करने की मांग की।
सोलंकी ने कहा, “यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियां बहुत चिंताजनक हैं। एनटीए की गलतियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।”
आइसा ने आरोप लगाया कि जब छात्र और युवा एनटीए मुख्यालय पर एकत्र हुए तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
छात्र संगठन ने कहा, “हम विरोध कर रहे छात्रों को बेरहमी से हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।”
पुलिस की तरफ से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
भाषा
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प्रशांत अविनाश
अविनाश

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