न्यायालय ने अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी से निष्पक्ष जांच के लिए कहा

न्यायालय ने अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी से निष्पक्ष जांच के लिए कहा

न्यायालय ने अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी से निष्पक्ष जांच के लिए कहा
Modified Date: March 23, 2026 / 06:05 pm IST
Published Date: March 23, 2026 6:05 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले की जांच में सीबीआई और ईडी द्वारा दिखाई गई ‘‘अनिच्छा’’ पर सोमवार को नाराजगी व्यक्त की और उन्हें इस मामले में ‘‘निष्पक्ष, तटस्थ, पारदर्शी और समयबद्ध’’ जांच करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया और सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों को ‘‘ईडी को पूर्ण सहयोग प्रदान करने’’ का निर्देश दिया।

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी मामले की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध करते हुए पूर्व नौकरशाह ई ए एस शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को यह अनुमति दी कि यदि अन्य सरकारी निकाय उन्हें सहयोग देने में अनिच्छा दिखाते हैं तो वे उससे संपर्क कर सकते हैं।

सुनवाई की शुरुआत में मेहता ने पीठ को सूचित किया कि पूर्व के आदेश के अनुसार, ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र के वित्तीय विशेषज्ञों को मिलाकर एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने अब तक 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

दूसरी ओर, शर्मा की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि धन की हेराफेरी के लिए योजना बनाई गई थी, फिर भी सीबीआई ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। हम मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां नहीं कर सकते।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम उन्हें यह निर्देश नहीं दे सकते कि किसे गिरफ्तार करना है; लेकिन जांच एजेंसियों की ओर से दिखाई गई अनिच्छा स्वीकार्य नहीं है। उन्हें समयबद्ध तरीके से बताना चाहिए कि क्या पाया गया है। आपकी जांच से पता चलना चाहिए कि क्या किया गया है और इससे न केवल हमें, बल्कि सभी को विश्वास होना चाहिए।’’

पीठ ने जांच एजेंसियों की नयी वस्तु स्थिति रिपोर्ट में सामने आए कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि सीबीआई और ईडी वर्तमान में क्रमशः सात और आठ प्राथमिकी की जांच कर रही हैं। पीठ ने यह भी कहा कि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण का निपटारा कथित तौर पर 26 करोड़ रुपये का भुगतान करके किया गया है।

पीठ ने कहा कि अनुमान है कि धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 73,000 करोड़ रुपये है।

न्यायालय ने कहा, ‘‘जांच एजेंसियों को इस मामले की तह तक जाना चाहिए। हम सीबीआई और ईडी से आग्रह करते हैं कि जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से पूरा किया जाए ताकि इसे समयबद्ध तरीके से तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके।’’

अनिल अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि जनहित याचिका लंबित होने के कारण, ऋण देने वाले बैंक बकाया राशि के निपटान के लिए उनसे बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। रोहतगी ने कहा, ‘‘मामले के लंबित होने के कारण वे हिचकिचा रहे हैं।’’

पीठ ने कहा कि उसने किसी को भी सलाह-मशविरा करने से नहीं रोका है।

पीठ ने जांच एजेंसियों से नयी वस्तु स्थिति रिपोर्ट मांगी और जनहित याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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