कर्नाटक के दो जिलों के बाहर ‘कंबाला’ आयोजित करने के खिलाफ दायर याचिका शीर्ष अदालत में खारिज

कर्नाटक के दो जिलों के बाहर 'कंबाला' आयोजित करने के खिलाफ दायर याचिका शीर्ष अदालत में खारिज

कर्नाटक के दो जिलों के बाहर ‘कंबाला’ आयोजित करने के खिलाफ दायर याचिका शीर्ष अदालत में खारिज
Modified Date: March 10, 2026 / 03:47 pm IST
Published Date: March 10, 2026 3:47 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में ‘कंबाला’ (भैंसों की दौड़ प्रतियोगिता) के आयोजन के खिलाफ दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।

शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि इसे राज्य के केवल एक खास क्षेत्र तक ही क्यों सीमित रखा जाए।

कर्नाटक में नवंबर से मार्च के बीच आयोजित होने वाली कंबाला दौड़ में एक जोड़ी भैंसों को हल से बांधा जाता है और उन्हें एक व्यक्ति नियंत्रित करता है। उन्हें कीचड़ भरे समानांतर ट्रैक पर दौड़ाया जाता है, और सबसे तेज दौड़ने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ‘‘पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया’’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पेटा ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 14 नवंबर के आदेश को चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने राज्य को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के बाहर किसी भी स्थान को कंबाला आयोजन के लिए अधिसूचित करने से रोकने की मांग खारिज कर दी थी।

न्यायमूर्ति मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘यदि वे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करना चाहते हैं, तो इसमें क्या गलत है? राज्य के अन्य हिस्सों के लोगों को भी इस संस्कृति से परिचित होने दीजिए। इसे केवल किसी एक क्षेत्र तक ही क्यों सीमित रखा जाए?’’

पेटा इंडिया की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत में राज्य सरकार द्वारा पहले दायर किए गए एक हलफनामे का हवाला दिया। तब शीर्ष अदालत कंबाला से ही संबंधित याचिकाओं पर विचार कर रही थी।

वकील ने कहा कि उस हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा था कि यह कर्नाटक के दो तटीय जिलों में पारंपरिक खेल है।

वकील ने दलील दी, ‘‘इसका बेंगलुरु की परंपरा और संस्कृति से कोई संबंध नहीं है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अब यह आयोजन राज्य की राजधानी के एक मैदान में किया जाना है।

याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘कभी न कभी हम पेटा के दृष्टिकोण के बारे में भी कुछ सवाल पूछ सकते हैं।’’

शीर्ष अदालत की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने मई 2023 में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक के उन संशोधन अधिनियमों की वैधता को बरकरार रखा था, जिनमें सांडों को नियंत्रित करने वाला खेल ‘जल्लीकट्टू’, बैलगाड़ी दौड़ और भैंस दौड़ का खेल ‘कंबाला’ शामिल हैं। इसने कहा कि ये “वैध कानून” हैं।

भाषा सुरेश पवनेश

पवनेश


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