उच्चतम न्यायालय व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए है: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां

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उच्चतम न्यायालय व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए है: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 07:05 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि शीर्ष अदालत की स्थापना नागरिकों को स्वतंत्रता से वंचित करने और मानवाधिकार हनन को उचित ठहराने के लिए नहीं की गई है।

‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ द्वारा गोवा में आयोजित एक परिचर्चा में, न्यायमूर्ति भुइयां ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों को एक स्वर में बोलना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी अदालतों में कानून का समान रूप से पालन किया जाए और अन्य देश सफेदपोश अपराधियों का प्रत्यर्पण करने में संकोच न करें।

उन्होंने रविवार को कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा करना है। उच्चतम न्यायालय की स्थापना स्वतंत्रता से वंचित करने और मानवाधिकारों के हनन को उचित ठहराने के लिए नहीं की गई है।’’

न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कानून के मूलभूत सिद्धांतों पर मतभेद नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा, ‘‘धारणा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जब हम कानून के सिद्धांतों को लागू करते हैं, तो उच्चतम न्यायालय में विचारों की बहुलता नहीं हो सकती।’’

संविधान का पालन करना आवश्यक बताते हुए न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी विश्वसनीयता बढ़ानी चाहिए और अपराधियों के राजनीतिक रूप से पाला बदलने पर उन पर कार्रवाई करने में भेदभाव नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया है, तो हमें सामाजिक लेखापरीक्षा की आवश्यकता है।’’

शनिवार को पुणे में एक कार्यक्रम में, न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा था कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता ‘‘अपरिवर्तनीय’’ है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों के तबादलों और नियुक्तियों में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा खतरा ‘‘अंदर से ही है।’’ न्यायमूर्ति भुइयां ने केंद्र के सुझाव पर एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तबादले से संबंधित उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के फैसले पर निराशा व्यक्त की थी।

भाषा सुभाष नेत्रपाल

नेत्रपाल