चक्‍करपुर भूखंड मामले में उच्चतम न्यायालय का हरियाणा के अधिकारियों को नोटिस

चक्‍करपुर भूखंड मामले में उच्चतम न्यायालय का हरियाणा के अधिकारियों को नोटिस

चक्‍करपुर भूखंड मामले में उच्चतम न्यायालय का हरियाणा के अधिकारियों को नोटिस
Modified Date: April 21, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: April 21, 2026 4:27 pm IST

गुरुग्राम, 21 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अवैध निर्माण के एक मामले में दिसंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले पर कथित रूप से अमल नहीं किये जाने को लेकर दायर एक अवमानना याचिका पर हरियाणा सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

इससे शहरी नियोजन नियमों के लागू करने में व्याप्त खामियों (खासकर हरियाणा के गुरुग्राम में) की ओर फिर से ध्यान केंद्रित हुआ है।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ कर दिया और प्रतिवादियों को 17 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फिलहाल कथित अवमाननाकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट भी दे दी है।

‘‘राजदरबार आइकॉनिक वेंचर प्राइवेट लिमिटेड’’ द्वारा दायर इस याचिका में हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, जिनमें मुख्य सचिव, वरिष्ठ शहर नियोजन अधिकारी, नगर निगम अधिकारी और बिजली विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

याचिका में कुछ अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। इन सभी पर शीर्ष अदालत के 17 दिसंबर 2024 के आदेश की “जानबूझकर अवहेलना” करने का आरोप लगाया गया है।

विवाद के केंद्र में गुरुग्राम के चक्करपुर गांव स्थित 1.39 एकड़ का एक भूखंड है, जिस पर याचिकाकर्ता ने अवैध अतिक्रमण किये जाने और बिना वैधानिक मंजूरी के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण का आरोप लगाया है।

याचिका में दावा किया गया है कि अनधिकृत ढांचों को बिजली, पानी और सीवरेज जैसी नागरिक सुविधाएं देने पर रोक लगाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद, ये सेवाएं अब भी दी जा रही हैं।

याचिका के अनुसार, दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच हरियाणा के अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन भेजे गए, जिनमें इन निर्देशों को लागू करने और विवादित संपत्ति की बिजली-पानी आदि जैसी नागरिक सुविधाएं निरस्त करने की मांग की गई।

हालांकि, कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते कंपनी को सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवमानना याचिका का परिणाम शहरी प्रशासन पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, खासकर गुरुग्राम जैसे तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में, जहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण निरंतर बनी रहने वाली एक समस्या है।

भाषा सुरेश अविनाश

अविनाश


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