उच्चतम न्यायालय ने मोटर दुर्घटना पीड़ितों की आय की गणना के लिए दिशा-निर्देश तय किये

उच्चतम न्यायालय ने मोटर दुर्घटना पीड़ितों की आय की गणना के लिए दिशा-निर्देश तय किये

उच्चतम न्यायालय ने मोटर दुर्घटना पीड़ितों की आय की गणना के लिए दिशा-निर्देश तय किये
Modified Date: July 1, 2026 / 05:56 pm IST
Published Date: July 1, 2026 5:56 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मोटर दुर्घटना मुआवजे में एकरूपता लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसले में बुधवार को दिशा-निर्देश तय किए कि अदालतें मृत लोगों या घायल दावेदारों की वार्षिक आय का निर्धारण आयकर रिटर्न (आईटीआर) के आधार पर कैसे करें।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए वार्षिक आय दिखाने के लिए केवल पिछले वर्ष की आईटीआर पर्याप्त होगी, जबकि स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के मामले में, पिछले तीन वर्षों तक के आईटीआर में घोषित औसत आय को सामान्यतः संदर्भ के रूप में माना जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वार्षिक आय की गणना के लिए कोई निश्चित सूत्र नहीं हो सकता, लेकिन उन्होंने मुआवजे के निर्धारण के उद्देश्य से आईटीआर के आधार पर वेतनभोगी कर्मचारियों और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के बीच अंतर स्पष्ट किया।

न्यायमूर्ति करोल ने कहा, ‘‘इस न्यायालय के विचार में, किसी मृत व्यक्ति/दावेदार की वार्षिक आय की गणना के लिए कोई सख्त और निश्चित नियम नहीं हो सकता। आईटीआर एक वैधानिक दस्तावेज होने के कारण, मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के उद्देश्य से किसी व्यक्ति की आय का आकलन करने में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु होता है।’’

फैसले में वरिष्ठ वकील जे. आर. मिधा द्वारा दी गई दलीलों से सहमति जताई गई कि वार्षिक आय के आकलन के मामले में वेतनभोगी व्यक्तियों और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के बीच स्पष्ट विभाजन किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारे विचार में, वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए वेतन से होने वाली वार्षिक आय दर्शाने हेतु केवल पिछले वर्ष का आयकर रिटर्न पर्याप्त होगा। केवल पिछले वर्ष को ध्यान में रखने का कारण यह है कि पदोन्नति का वित्तीय प्रभाव महत्वपूर्ण होता है और वह केवल उसी वर्ष के आयकर रिटर्न में परिलक्षित हो सकता है।’’

इसने कहा कि हालांकि, जहां दुर्घटना से ठीक पहले पदोन्नति या वेतन संशोधन हुआ हो और वह नवीनतम रिटर्न में पूरी तरह परिलक्षित न हुआ हो, वहां अदालतें पदोन्नति पत्रों और अन्य वित्तीय अभिलेखों पर भी विचार कर सकती हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारे विचार में, व्यवसाय से होने वाली वार्षिक आय के आकलन के लिए पिछले तीन वर्षों तक के आयकर रिटर्न में दर्शाई गई आय का औसत एक संदर्भ बिंदु के रूप में लिया जाना चाहिए। यह भी संभव है कि कुछ मामलों में केवल एक या दो आईटीआर ही दाखिल किए गए हों।’’

इसने कहा, ‘‘ऐसी परिस्थितियों और इन पेशों में आय के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, अन्य परिस्थितियों पर भी विचार किया जाना चाहिए।’’

न्यायालय ने यह निर्णय निर्माण व्यवसायी रश्मिरेखा त्रिपाठी के परिवार द्वारा श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

शीर्ष अदालत ने दावेदारों के देय मुआवजे में भी वृद्धि की।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश


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