उच्चतम न्यायालय ने फर्जी रेम्डेसिविर टीका मामले में डॉक्टर को हिरासत में रखने का आदेश रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने फर्जी रेम्डेसिविर टीका मामले में डॉक्टर को हिरासत में रखने का आदेश रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने फर्जी रेम्डेसिविर टीका मामले में डॉक्टर को हिरासत में रखने का आदेश रद्द किया
Modified Date: November 29, 2022 / 08:19 pm IST
Published Date: October 29, 2021 7:24 pm IST

नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान फर्जी रेम्डेसिविर टीका खरीद मामले में शुक्रवार को जबलपुर के डॉक्टर की हिरासत अवधि बढ़ाए जाने संबंधी आदेश रद्द कर दिया और कहा कि राज्य सरकार ने डॉक्टर के प्रस्तुतिकरण पर निर्णय लेने में देरी की।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 22 (गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण) का हवाला दिया और कहा कि स्वतंत्र भारत में निवारक हिरासत का प्रयोग संवैधानिक सुरक्षा उपायों का पूर्ण रूप से अनुपालन करते हुए किया जाना है।

न्यायालय ने दो आधार पर हिरासत में रखने के आदेश को गलत करार दिया, पहला कि आवेदक के प्रस्तुतिकरण पर निर्णय लेने में मध्य प्रदेश सरकार ने देरी की और दूसरा, तय समयसीमा के भीतर आवेदक को उसका प्रस्तुतिकरण खारिज करने के संबंध में केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार सूचित करने में विफल रही।

शीर्ष अदालत ने डॉक्टर को हिरासत में रखने के उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालत के समक्ष ऐसी कोई भी सामग्री पेश नहीं की गई जोकि ये दर्शाती हो कि केंद्र सरकार द्वारा आवेदक का प्रस्तुतिकरण खारिज किए जाने के संबंध में उसे सूचित किया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और वकील अश्विनी कुमार दूबे ने दलील दी कि राज्य सरकार ने डॉक्टर सरबजीत सिंह मोखा के प्रस्तुतिकरण पर कोई जवाब पेश नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि रेम्डेसिविर की कथित कालाबाजारी के लिए एनएसए के अंतर्गत आवेदक की हिरासत अवधि बढ़ाया जाना गैर-कानूनी है।

भाषा शफीक अनूप

अनूप


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