उच्चतम न्यायालय ने तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट जारी करने की याचिका ठुकराई

उच्चतम न्यायालय ने तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट जारी करने की याचिका ठुकराई

उच्चतम न्यायालय ने तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट जारी करने की याचिका ठुकराई
Modified Date: April 29, 2026 / 06:27 pm IST
Published Date: April 29, 2026 6:27 pm IST

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट जारी करने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि विदेश यात्रा की योजना तय होने पर वह नयी याचिका दायर कर सकती हैं।

सीतलवाड़ ने अपने पासपोर्ट की वापसी का अनुरोध किया था, जिसे 2002 के गोधरा दंगों के बाद निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेज़ों की जालसाजी के मामले में जमानत की शर्त के रूप में अदालत में जमा कराया गया था।

उनकी याचिका पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।

पीठ ने सीतलवाड़ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, ‘‘क्या उनको जल्द कहीं जाना है? जैसे ही वह (सीतलवाड़) अपनी यात्रा का कार्यक्रम तय कर लें, हमें सूचित करें। हम पासपोर्ट इस तरह वापस नहीं करेंगे।’’

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आपको हमें यह बताना होगा कि आपको किस देश की यात्रा करनी है। विदेश यात्रा के लिए आपको अपना पासपोर्ट वापस चाहिए। इसके लिए आपको एक ठोस आधार तैयार करना होगा।’’

सिब्बल ने कहा कि सीतलवाड़ को विदेश यात्रा के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी। याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, जब भी याचिकाकर्ता विदेश यात्रा करना चाहे, वह नयी याचिका दाखिल कर सकती हैं।’’

उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल को कहा था कि सीतलवाड़ की याचिका को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के आदेश के बाद तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सकता है, क्योंकि जमानत तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने नौ जुलाई 2023 को उन्हें जमानत दे दी थी। यह मामला 2002 के गोधरा दंगों के बाद निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित रूप से दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ा था। शीर्ष अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ और ‘‘विरोधाभासी’’ बताया था, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार किया गया था।

एक जुलाई 2023 के उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि सीतलवाड़ से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और अधिकांश साक्ष्य दस्तावेज़ी प्रकृति के हैं।

भाषा आशीष रंजन

रंजन


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