चंबल पुल की बुनियाद के पास खनन को लेकर न्यायालय की मप्र सरकार को फटकार

चंबल पुल की बुनियाद के पास खनन को लेकर न्यायालय की मप्र सरकार को फटकार

चंबल पुल की बुनियाद के पास खनन को लेकर न्यायालय की मप्र सरकार को फटकार
Modified Date: April 13, 2026 / 09:49 pm IST
Published Date: April 13, 2026 9:49 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश में एक वनरक्षक की हत्या और रेत माफियाओं द्वारा राज्य को राजस्थान से जोड़ने वाले चंबल पुल की बुनियाद के इर्द-गिर्द रेत खनन को ‘‘चौंकाने वाली घटनाएँ’’ और राज्य सरकार की ‘‘विफलता’’ करार दिया।

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि या तो राज्य सरकार चंबल नदी पर अवैध खनन को रोकने में विफल रही है या ऐसा राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘वे पुल (की बुनियाद) की खुदाई कर रहे हैं और अगर पुल गिर जाता है, तो कौन जिम्मेदार होगा? तस्वीरें खुद ही सबकुछ बयां कर रही हैं।’’

इसने कहा, ‘‘वन अधिकारियों को रेत माफियाओं द्वारा कुचल दिया जाता है और एक पुल की नींव खोद दी जाती है। यह एक बेहद चौंकाने वाली स्थिति है। या तो राज्य सरकार अवैध रेत खनन को नियंत्रित करने में विफल रही है या इसमें उसकी मिलीभगत है।’’

पीठ ने मप्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से कहा, ‘‘यह सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है। अदालत मित्र वकील ने बताया कि आपके पास हथियार नहीं हैं। फिर राज्य सरकार का अस्तित्व ही क्यों है?’’

इसने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘‘ये खुदाई करने वाली मशीन और बुलडोजर बहुत ही धर्मनिरपेक्ष हैं, ये जिस व्यक्ति को मार रहे हैं उसकी जाति नहीं देखते… यह बेहद दुखद स्थिति है, राज्य सरकारें पूरी तरह विफल हो गई हैं या यूं कहें कि वे मिलीभगत कर रही हैं। यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि एक पुल की नींव खोदी जा रही है और सरकार इस पर आंखें मूंदकर बैठी है।’’

न्यायालय ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा’ शीर्षक से स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा है।

इस मामले में अदालत मित्र के रूप में सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने कहा कि यह 32 खंभों वाला एक महत्वपूर्ण पुल है, जो मध्यप्रदेश और राजस्थान को जोड़ता है, लेकिन रेत माफिया इन खंभों की नींव खोद रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ओडिशा, असम और महाराष्ट्र ने एक अधिसूचना जारी कर वन अधिकारियों को रेत माफियाओं पर गोली चलाने का अधिकार दिया है तथा इसी तरह मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को पत्र लिखकर रेत माफियाओं पर गोली चलाने की शक्तियां प्राप्त करने की अनुमति मांगी है।

यह उल्लेख करते हुए कि इससे पहले भी एक आईपीएस अधिकारी की हत्या अवैध रेत माफियाओं ने कर दी थी, न्यायमूर्ति मेहता ने राज्य के अधिकारियों को अवैध खनन की निगरानी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की संभावना तलाशने को कहा।

पीठ ने सुझाव दिया कि क्षेत्र में संबंधित मशीनों में जीपीएस प्रणाली लगाई जा सकती है, ताकि उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा सके।

पीठ ने रेत माफियाओं द्वारा कथित तौर पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर वन रक्षक की हत्या किए जाने के मामले में अब तक की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट और सीसीटीवी कैमरों की व्यवहार्यता रिपोर्ट मांगी।

भाषा

नेत्रपाल सुरेश

सुरेश


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