न्यायालय ने कोयला चालित उद्योगों को एनसीआर से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब मांगा

न्यायालय ने कोयला चालित उद्योगों को एनसीआर से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब मांगा

न्यायालय ने कोयला चालित उद्योगों को एनसीआर से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब मांगा
Modified Date: February 23, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: February 23, 2026 6:21 pm IST

नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बेहतर वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला-आधारित उद्योगों को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों से जवाब मांगा।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार वायु गुणवत्ता की समस्या से निपटने के लिए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि वह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सुझावों के आधार पर 12 मार्च को गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे की जांच करेगी।

उसने निर्माण और तोड़-फोड़ की वजह से होने वाली धूल से निपटने के लिए सीएक्यूएम के सुझाए गए तरीकों पर सभी हितधारकों से भी जवाब मांगा।

शीर्ष अदालत ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय से इस सुझाव पर जवाब मांगा कि दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में कोई नया कोयला-आधारित तापीय ऊर्जा संयंत्र न लगाया जाए।

अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को एनसीआर में कोयला-आधारित उद्योगों समेत हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

इन नोटिस को अदालत द्वारा भेजा गया माना जाएगा और राज्यों को मिली प्रतिक्रिया का विवरण देते हुए एक कार्रवाई योजना जमा करनी होगी।

उसने तीनों मंत्रालयों से एनसीआर के अंदर कोयला-आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के मकसद से एक संयुक्त प्रस्ताव जमा करने को कहा।

पीठ ने आदेश दिया, ‘‘प्रस्ताव में सबसे पहले उद्योगों की पहचान की जाएगी और यह तय किया जाएगा कि उनके लिए कौन से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत मुहैया कराए जा सकते हैं।’’

पीठ ने अब सभी हितधारकों को 12 मार्च को अगली सुनवाई से पहले अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट और प्रस्ताव दायर करने का निर्देश दिया है।

भाषा वैभव दिलीप

दिलीप


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