बिहार एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला बंगाल मामले पर पूरी तरह लागू नहीं होता: टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी

बिहार एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला बंगाल मामले पर पूरी तरह लागू नहीं होता: टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी

बिहार एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला बंगाल मामले पर पूरी तरह लागू नहीं होता: टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी
Modified Date: May 27, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: May 27, 2026 8:15 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने बुधवार को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय का फैसला केवल बिहार मामले तक सीमित है और ये निर्णय पूरे देश पर लागू नहीं माना जा सकता।

टीएमसी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में उठाए गए मुद्दे ‘‘पूरी तरह से अलग’’ हैं।

उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता बनर्जी ने कहा कि अदालत ने बार-बार स्पष्ट किया था कि उसकी टिप्पणियां बिहार और संबंधित मामले में उठाए गए विशिष्ट मुद्दों तक ही सीमित हैं।

कल्याण बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय का फैसला केवल बिहार मामले के लिए था। अदालत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उसकी टिप्पणियां केवल बिहार मामले तक ही सीमित हैं।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘‘अदालत की यह टिप्पणी है कि निर्वाचन आयोग को नागरिकता संबंधी मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है’’।

बनर्जी ने कहा, ‘‘यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से इस आधार पर हटा दिया जाता है कि उसे गैर-नागरिक माना जाता है, तो निर्वाचन आयोग को यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं है कि वह व्यक्ति नागरिक है या गैर-नागरिक।’’

उन्होंने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी अंततः यह मानता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है, तो उस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बहाल किया जाना चाहिए।

टीएमसी नेता ने अदालत की टिप्पणियों को अपनी पार्टी के उस रुख से जोड़ा कि न तो केंद्र सरकार और न ही पुलिस स्वतंत्र रूप से नागरिकता की स्थिति तय कर सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि केंद्र सरकार या पुलिस के पास यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि कौन नागरिक है और कौन नागरिक नहीं है।’’

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को निर्वाचन आयोग को बड़ी राहत देते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के उसके अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक दायित्व में ‘‘जान फूंकती है।’’

इस बेहद चर्चित मुद्दे पर अपने फैसले में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया ‘‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाती है।’’

बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना इस बात की कानूनी घोषणा नहीं है कि कोई व्यक्ति नागरिक नहीं है।

भाषा

शफीक प्रशांत

प्रशांत


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