स्वराज: कला, फोटोग्राफी और संस्कृति के जरिए भारत के इतिहास से रूबरू कराने वाली प्रदर्शनी

स्वराज: कला, फोटोग्राफी और संस्कृति के जरिए भारत के इतिहास से रूबरू कराने वाली प्रदर्शनी

स्वराज: कला, फोटोग्राफी और संस्कृति के जरिए भारत के इतिहास से रूबरू कराने वाली प्रदर्शनी
Modified Date: August 17, 2026 / 03:16 pm IST
Published Date: August 17, 2026 3:16 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) महात्मा गांधी की लैपटॉप के साथ बनी लाल रंग की एक खास प्रतिमा, आरएसएस के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ में प्रकाशित पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक चित्र, पुराने पोस्टर और 1857 के विद्रोह तथा भारत के विरोध प्रदर्शनों को दिखाती तस्वीरें एक प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

इस प्रदर्शनी में कला, तस्वीरों और पुराने दस्तावेजों के जरिए भारत के राजनीतिक इतिहास को फिर से देखने की कोशिश की गई है। “स्वराज: रिविजुअलाइजिंग इंडियाज पॉलिटिकल हिस्ट्री” नामक यह प्रदर्शनी फिलहाल इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी है। इसका आयोजन तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (टीआरआईएस) ने किया है।

इस प्रदर्शनी में दुर्लभ कलाकृतियां, तस्वीरें, राजनीतिक पोस्टर, किताबें, फिल्मों के प्रचार से जुड़ी सामग्री और पुराने वीडियो, लिखित तथा ऑडियो रिकॉर्ड शामिल हैं। प्रदर्शनी में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि भारत की राजनीतिक यात्रा को किस तरह देखा गया, दिखाया गया और याद रखा गया।

टीआरआईएस के संस्थापक नेविल तुली ने प्रदर्शनी के बारे में बताया, “भारत के राजनीतिक इतिहास को सही मायने में समझने के लिए उसकी यात्रा के हर पहलू के प्रति गहरा प्रेम और समझ जरूरी है।

उन्होंने कहा, “पाठ्यपुस्तकों में दिए गए इतिहास से अलग, मैंने मीडिया की भूमिका को भी इसमें शामिल किया है। इसमें अखबारों से लेकर ‘पीपुल्स वार एंड एज’, ‘ऑर्गनाइजर’, ‘हिम्मत’ जैसी पत्रिकाएं और 1980-90 के दशक में भारत में हिंसा तथा विरोध प्रदर्शनों के दौरान काम करने वाले रॉयटर्स के फोटो पत्रकार के फोटो भी शामिल हैं।”

प्रदर्शनी 19 अगस्त को समाप्त होगी।

भाषा

जोहेब मनीषा

मनीषा


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