तमिलनाडु विधानसभा : राज्यपाल अभिभाषण पढे़ बिना ही सदन से चले गए, स्टालिन ने की आलोचना

तमिलनाडु विधानसभा : राज्यपाल अभिभाषण पढे़ बिना ही सदन से चले गए, स्टालिन ने की आलोचना

तमिलनाडु विधानसभा : राज्यपाल अभिभाषण पढे़ बिना ही सदन से चले गए, स्टालिन ने की आलोचना
Modified Date: January 20, 2026 / 02:16 pm IST
Published Date: January 20, 2026 2:16 pm IST

चेन्नई, 20 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि मंगलवार को राज्य विधानसभा के इस साल के पहले सत्र में सदन में अपना अभिभाषण पढ़े बिना ही बाहर चले गए। राज्यपाल ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में ‘‘बहुत-सी गलतियां होने’’ का आरोप लगाया।

राज्यपाल के सदन से जाने के बाद, मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने उनकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह ‘‘नियमों, परंपराओं का उल्लंघन करते हुए एक बार फिर सदन से बाहर चले गए हैं।’’ स्टालिन ने कहा कि रवि का व्यवहार उनके उच्च पद के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सदन और उसकी गरिमा का अपमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन के माध्यम से उन प्रावधानों को हटाने का प्रयास करेगी, जिनमें वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण को अनिवार्य बनाया गया है।

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मुख्यमंत्री ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें कहा गया कि सदन राज्यपाल के परंपरागत संबोधन न पढ़ने के व्यवहार को स्वीकार नहीं करता है। साथ ही, इसमें यह भी कहा गया कि केवल सरकार द्वारा तैयार किया गया पाठ ही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, जो विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु तमिल में पढ़ेंगे।

सदन के प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद, स्टालिन ने विधायकों को धन्यवाद दिया और कहा कि सरकार द्वार तैयार अभिभाषण को राज्यपाल के हर साल पढ़ने से इनकार करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपालों द्वारा इस तरह की समस्याएं पैदा करना कई राज्यों में होता है, यह केवल तमिलनाडु में ही नहीं होता।

उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत में राज्यपाल द्वारा सरकार की नीतिगत घोषणा पढ़ना एक प्रचलित परंपरा है। उन्होंने कहा कि जब कोई राज्यपाल बार-बार इस परंपरा का उल्लंघन करता है, तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि ‘ऐसा नियम/प्रथा क्यों होना चाहिए?’

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए, उनकी पार्टी – द्रमुक, संसद में समान विचारधारा वाली पार्टियों के समर्थन से संविधान में संशोधन के माध्यम से वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण को अनिवार्य बनाने वाले प्रावधानों को हटाने के प्रयास करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176 के अनुसार परंपरागत संबोधन राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और इसे राज्यपाल द्वारा पूरी तरह से पढ़ा जाना चाहिए।

उन्होंने सदन में कहा, ‘‘राज्यपाल के पास अभिभाषण पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करने या राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण से सामग्री हटाने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि यह खेदजनक है कि राज्यपाल ने 8.5 करोड़ तमिल जनता की भावनाओं को दर्शाने वाले सदन से बाहर चले जाने का अपना व्यवहार दोहराया।

उन्होंने कहा, “एक राज्यपाल को राज्य के कल्याण की चिंता करनी चाहिए, जनता के विकास में रुचि रखनी चाहिए और सत्य बोलना चाहिए। उसे उस सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए, जो व्यापक जन समर्थन और बहुमत के साथ सत्ता में आई है।”

उन्होंने कहा, “संविधान पद पर आसीन व्यक्ति से यही अपेक्षा करता है। लेकिन वह इसके खिलाफ कार्य करते हैं….राज्य प्रशासन को बाधित करने की कोशिश करते हैं। उनका यहां (विधानसभा में) उसी तरीके का प्रयास करना अस्वीकार्य है।”

जब रवि विधानसभा से निकल गए तो सत्तारूढ़ पार्टी और उसके सहयोगियों के विधायक खड़े हो गए और अपनी आवाज उठाई, लेकिन शोरगुल होने के कारण कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 अप्रैल 2023 को उन्होंने द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई के उस कथन को याद किया था जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘न तो बकरी को दाढ़ी की आवश्यकता होती है, न ही राज्य को राज्यपाल की’’। उन्होंने कहा कि हालांकि, राज्यपालों को हमेशा उचित सम्मान दिया जाता रहा है।

भाषा यासिर अमित

अमित


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