तमिलनाडु अदालत ने घृणास्पद भाषण मामले में पूर्व मंत्री पोनमुडी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया

तमिलनाडु अदालत ने घृणास्पद भाषण मामले में पूर्व मंत्री पोनमुडी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया

तमिलनाडु अदालत ने घृणास्पद भाषण मामले में पूर्व मंत्री पोनमुडी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया
Modified Date: August 7, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: August 7, 2026 12:03 am IST

चेन्नई, छह अगस्त (भाषा) तमिलनाडु की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के. पोनमुडी के खिलाफ शैव, वैष्णव समुदायों तथा महिलाओं के बारे में कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया।

पिछले वर्ष एक कार्यक्रम में पोनमुडी द्वारा कथित रूप से ये टिप्पणियां किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चेन्नई नगर निगम की पार्षद उमा आनंदन ने एक निजी शिकायत दायर की थी। इसके बाद यहां जॉर्ज टाउन स्थित तृतीय महानगर मजिस्ट्रेट अदालत ने मामले का संज्ञान लिया था।

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी. के. इलंथिरैयन ने पिछले महीने पोनमुडी की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें भाजपा नेता की शिकायत को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

इसी पृष्ठभूमि में जब मामला जॉर्ज टाउन स्थित अदालत में सुनवाई के लिए आया, तो शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।

आरोपी के वकील ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 355 के तहत एक याचिका दायर की, जिसमें आरोपी की अनुपस्थिति को माफ करने का अनुरोध किया गया था। इस धारा के तहत न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट आरोपी की गैर-मौजूदगी में जांच या सुनवाई जारी रख सकते हैं।

शिकायतकर्ता के वकील ने आरोपी की लगातार अनुपस्थिति का हवाला देते हुए इस याचिका का कड़ा विरोध किया। विभिन्न तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी के वकील की याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की अनुपस्थिति से न्यायिक कार्यवाही बाधित होगी।

अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है और शिकायतकर्ता की ओर से भी याचिका पर आपत्ति जताई गई है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए मजिस्ट्रेट अदालत ने याचिका खारिज कर दी, आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर, 2026 की तारीख निर्धारित की।

भाषा तान्या नेत्रपाल शफीक

शफीक


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