‘आशूरा’ पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में निकाला गया ताजिया जुलूस

‘आशूरा’ पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में निकाला गया ताजिया जुलूस

‘आशूरा’ पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में निकाला गया ताजिया जुलूस
Modified Date: June 26, 2026 / 09:59 pm IST
Published Date: June 26, 2026 9:59 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में पुरानी दिल्ली से लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली समेत कई इलाकों में मुहर्रम के महीने के 10वें दिन शुक्रवार को इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया जुलूस निकाला गया।

इन जुलूस के आयोजकों के मुताबिक, ‘आशूरा’ के मौके पर पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद, चावड़ी बाजार, पहाड़गंज और कश्मीरी गेट तथा उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर, जाफराबाद, ब्रह्मपुरी, शास्त्री पार्क, सीमापुरी, मुस्तफाबाद और चांद बाग तथा दक्षिण दिल्ली में ओखला जामिया नगर, बटला हाउस व महरौली समेत कई इलाकों में पारंपरिक ताजिए बड़ी संख्या में निकाले गए।

सातवीं सदी के अंत में इराक के करबला में इमाम हुसैन के कई साथियों की यजीद की फौज के साथ लड़ाई में जान चली गई थी और 10वें दिन इमाम हुसैन भी शहीद हो गए थे।

इस्लामी कलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के 10वें दिन ‘आशूरा’ को कहा जाता है। इस दिन देश के अलग अलग हिस्सों में इमाम हुसैन की याद में ताजिया जुलूस निकाला जाता है।

कश्मीर गेट स्थित ‘शिया जामा मस्जिद’ पर शिया समुदाय के सदस्यों ने मातम किया। इसके बाद काले कपड़े पहने समुदाय के सदस्य ‘या हुसैन’ कहते हुए नयी दिल्ली के रास्ते जोर बाग स्थित दरगाह शाह-ए-मर्दा करबला पहुंचे जहां यह इस जुलूस का समापन हो गया।

इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ‘आशूरा’ के जुलूस के मद्देनजर शहर में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों को तैनात किया गया था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जुलूस को लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी और पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनात की गई तथा ड्रोन से भी निगरानी की गई।

जाफराबाद में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. फहीम बेग ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में निकलने वाला ताजिया जुलूस तो क्षेत्र में ही स्थानीय करबला पर खत्म हो जाता है।

वहीं ताजिया जुलूस आयोजित करने वाले संगठन ‘अंजुमन ताजियादरान’ के मुख्य संरक्षक परवेज नूर ने बताया कि पुरानी दिल्ली और ओखला, जामिया नगर, महरौली व आसपास की अन्य कॉलोनियों से जुलूस जोर बाग स्थित करबला पहुंचते हैं।

भाषा नोमान

नोमान संतोष

संतोष

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