हैदराबाद, एक जून (भाषा) तेलंगाना अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म ‘डफाबेट’ के माध्यम से कई राज्यों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चलाने के आरोप में सोमवार को 11 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक अफगान नागरिक भी शामिल है। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि ये गिरफ्तारियां उस मामले की जांच के बाद हुईं, जिसमें करीमनगर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कथित तौर पर ‘डफाबेट’ के प्रचार अभियानों से आकर्षित होकर 2024 और जनवरी 2025 के बीच ऑनलाइन सट्टेबाजी में 9.95 लाख रुपये गंवा दिए थे।
सीआईडी की पुलिस महानिदेशक चारू सिन्हा ने यहां पत्रकारों को बताया कि बाद में इस मामले को तेलंगाना सरकार द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स से निपटने और नागरिकों को ऐसे प्लेटफार्मों से होने वाले आर्थिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान से बचाने के लिए गठित एक विशेष जांच दल को सौंप दिया गया था।
उन्होंने बताया कि एसआईटी ने शिकायतकर्ता के धन का पता आठ स्तरों पर फैले 46 ‘म्यूल’ बैंक खातों के नेटवर्क के माध्यम से लगाया, जिनका कथित तौर पर अवैध सट्टेबाजी की रकम को इकट्ठा करने और भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
‘म्यूल’ बैंक खाते ऐसे खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराधी खाताधारकों की जानकारी के बिना या कभी-कभी उसकी मिलीभगत से अवैध धन लेन-देन या धनशोधन के लिए करते हैं।
सिन्हा ने बताया कि छह महीने की अवधि में बैंक लेनदेन, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्हाट्सएप ग्रुप के फोरेंसिक विश्लेषण से एक समन्वित बहु-राज्यीय आपराधिक नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
आरोपियों के तौर-तरीकों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि वे ‘डफाबेट’ ऐप के माध्यम से क्रिकेट, कैसीनो गेम और एविएटर प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी को बढ़ावा देते थे।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, ‘डफाबेट’ को 2004 में फिलीपीन में शुरू किया गया था और बाद में इसने अपना परिचालन ब्रिटेन में स्थानांतरित कर दिया।
नयी दिल्ली, गुजरात और पंजाब में छह विशेष टीमें तैनात की गईं।
उन्होंने बताया कि आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और ठिकाने बदल रहे थे। इसके बावजूद पुलिस ने दो सप्ताह तक लगातार निगरानी और जमीनी स्तर पर अभियान चलाया, जिसके बाद 29 मई को सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपियों को हैदराबाद लाने के लिए ट्रांजिट वारंट प्राप्त किए गए। इसके बाद उन्हें करीमनगर स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (स्पेशल मोबाइल) पीसीआर अदालत में पेश किया गया।
पुलिस के अनुसार, पीड़ितों को आसानी से पैसा कमाने, बोनस और अधिक लाभ का वादा करके फुसलाया गया था।
उन्होंने बताया कि 11 आरोपियों में से दो आयोजक थे जिन्होंने कथित तौर पर ऐप से धनराशि प्राप्त की; तीन ने कमीशन पर फर्जी खाते बनाए; दो ने सट्टेबाजी ऐप की धनराशि को स्थानांतरित करने के लिए फर्जी फर्म बनाईं; और चार अन्य ने संचालन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की।
आरोप है कि अफगान नागरिक ने कमीशन के आधार पर म्यूल लेन-देन खातों की व्यवस्था की थी।
सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों आयोजकों को उनके बैंक खातों के आकलन के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 1.5 प्रतिशत का कमीशन मिलता था, जो लगभग आठ लाख रुपये से 10 लाख रुपये प्रति दिन के बराबर होता था।
उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) के आंकड़ों से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना में उनके खिलाफ 225 शिकायतें और 73 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो एक व्यवस्थित अखिल भारतीय परिचालन का संकेत देते हैं।
पुलिस ने आरोपियों से तीन कार, आठ लैपटॉप, 26 मोबाइल फोन और 3.21 लाख रुपये नकद जब्त किए।
सिन्हा ने कहा कि तेलंगाना में ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ अवैध है तथा राज्य भर में विभिन्न अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एप्लिकेशन के खिलाफ 414 मामले दर्ज किए गए हैं।
भाषा तान्या माधव
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