कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित होने वाली सेना बनाना लक्ष्य है : जनरल धीरज सेठ

कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित होने वाली सेना बनाना लक्ष्य है : जनरल धीरज सेठ

कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित होने वाली सेना बनाना लक्ष्य है : जनरल धीरज सेठ
Modified Date: July 1, 2026 / 05:41 pm IST
Published Date: July 1, 2026 5:41 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने बुधवार को कहा कि भारतीय सेना जंग के लिए हमेशा तैयार और युद्ध का व्यापक अनुभव रखने वाला बल है तथा इसका लक्ष्य एक ऐसी प्रौद्योगिकी युक्त और भविष्य के लिए तैयार सेना बनाना है जो कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘विजय’ शब्द का इस्तेमाल किया।

‘विजय’ शब्द को अंग्रेजी में लिखे जाने पर इसमें शामिल अक्षरों का अभिप्राय यहां ‘वी’ से ‘विजिलेंस (सतर्कता), आई से इनोवेशन (नवाचार), ‘जे’ से ‘ज्वाइंटनेस’ (एकीकृत), ‘ए’ से ‘आत्मनिर्भर’ और ‘वाई’ से ‘योद्धा प्रथम’ है।

जनरल सेठ, जो एक बेहतरीन सैन्य अधिकारी हैं और जिनके नाम पश्चिमी सीमा पर सेना की दो अभियानगत कमान संभालने का विशेष रिकॉर्ड है, ने मंगलवार को सेना प्रमुख का पदभार संभाला। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह ली, जो 40 साल से अधिक लंबे शानदार करियर के बाद 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए।

बुधवार को साउथ ब्लॉक के परिसर में सलामी गारद का निरीक्षण करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए जनरल सेठ ने कहा कि भारतीय सेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार और अनुभवी बल है, जो ‘‘युद्ध के मैदान में हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘31वें सेना प्रमुख के तौर पर कार्यभार संभालना मेरे लिए गर्व और विनम्रता का क्षण है। मैं कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र-सर्वोपरि के आदर्शों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं।’’

जनरल सेठ ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘उनका साहस, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और निस्वार्थ समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।’’

जनरल सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में ‘आर्म्ड कोर’ में शामिल किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘बदलते सुरक्षा माहौल की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें नये जोश और दृढ़ इरादे के साथ सेना के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मकसद एक ऐसी प्रौद्योगिकी-युक्त और भविष्य के लिए तैयार सेना बनाना है जो हर तरह से शक्तिशाली हो और कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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