न्यायालय ने रक्त चढ़ाने में होने वाले संक्रमण का पता लगाने वालीं जांच की जानकारी मांगी
न्यायालय ने रक्त चढ़ाने में होने वाले संक्रमण का पता लगाने वालीं जांच की जानकारी मांगी
नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को देश भर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को रक्त चढ़ाने से होने वाले एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण का पता लगाने के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन परीक्षण (एनएटी) करने की सुविधा के खर्च और उपलब्धता जैसी जानकारी मांगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने जनहित याचिका दाखिल करने वाले ‘सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन’ की ओर से पक्ष रख रहे वकील ए वेलन से पूछा कि एनएटी जांच करने में कितना खर्च आएगा और क्या यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है ताकि गरीब लोग भी इसका फायदा उठा सकें।
फाउंडेशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को याचिका में पक्ष बनाया।
जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को यह घोषित करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है कि “सुरक्षित रक्त का अधिकार” संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अहम हिस्सा है।
इसमें यह भी मांग की गई है कि “पूरे भारत में सभी ब्लड बैंकों में ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन (टीटीआई) का पता लगाने के लिए एनएटी को अनिवार्य किया जाना चाहिए, जिसमें सभी रक्तदाताओं से लिए गए खून में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी), हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी), हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी), मलेरिया और सिफलिस शामिल हैं, ताकि रक्त पाने वाले सभी लोगों को सुरक्षित और संक्रमण मुक्त रक्त मिल सके।”
दिल्ली के एनजीओ ने खासतौर पर थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को एचआईवी, एचसीवी और एचबीवी जैसे जानलेवा टीटीआई संक्रमण से बचाने में राज्य की ‘नाकामी’ को रेखांकित किया।
याचिका में कहा गया है कि भारत में हजोंरों लोगों के लिए खून चढ़ाना ‘मौत का जुआ’ बन गया है।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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