पूर्व नौकरशाह की पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम शासन में भ्रष्टाचार की आलोचना का मंच बना
पूर्व नौकरशाह की पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम शासन में भ्रष्टाचार की आलोचना का मंच बना
तिरुवनंतपुरम, 29 अप्रैल (भाषा) भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक पूर्व अधिकारी की पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम बुधवार को शासन में भ्रष्टाचार की आलोचना करने का मंच बन गया।
तिरुवनंतपुरम के पूर्व जिलाधिकारी बीजू प्रभाकर की पुस्तक ‘नाम नम्मे कोल्लयादिक्कुमबोल’ का यहां आयोजित एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया।
पूर्व पुलिस महानिदेशक ए हेमचंद्रन ने पुस्तक का विमोचन किया और इसकी पहली प्रति पूर्व पुलिस महानिदेशक एस अनंतकृष्णन को सौंपी।
प्रभाकर के सेवाकाल के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक विभिन्न सरकारी विभागों में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं को उजागर करती है।
लेखक के अनुसार, इसमें उनके कार्यकाल के दौरान देखी गई या जिनके बारे में उन्हें पता चला, उन ‘‘दिनदहाड़े लूट’’ की घटनाओं का प्रत्यक्ष विवरण प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक आंगनवाड़ी निर्माण से लेकर अदालती भवनों तक के क्षेत्रों में कथित भ्रष्टाचार पर चर्चा करती है।
इस कार्यक्रम में हेमचंद्रन ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक प्रतिरोध तभी उभर सकता है जब नागरिक स्वयं सुधार के सूत्रधार बन जाएं।
अनंतकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण के माध्यम से अधिक पारदर्शिता भ्रष्टाचार को रोकने और फाइल संबंधी जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।
वहीं, आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने कहा कि अधिकारियों द्वारा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बारे में खुलकर बोलने के लिए संवैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किए जाने से शासन में सुधार हो सकता है।
उन्होंने सामाजिक परिवर्तन को संभव बनाने में सूचना के अधिकार अधिनियम की क्षमता पर भी जोर दिया।
यह पुस्तक मनोरमा बुक्स द्वारा प्रकाशित की गई है। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं में पूर्ववर्ती त्रावणकोर रियासत से जुड़े राजपरिवार के सदस्य आदित्य वर्मा और मनोरमा बुक्स के प्रभारी संपादक थॉमस डोमिनिक शामिल थे।
भाषा नेत्रपाल अमित
अमित

Facebook


