शिंदे गुट में सांसदों के विलय के खिलाफ शिवसेना (उबाठा) की याचिका पर उच्च न्यायालय सुनवाई को तैयार
शिंदे गुट में सांसदों के विलय के खिलाफ शिवसेना (उबाठा) की याचिका पर उच्च न्यायालय सुनवाई को तैयार
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को शिवसेना (उबाठा) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पार्टी के छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को अनुमति देने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’ तथा मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी।
मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को अनुमति दी थी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि इन छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सदस्यों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।
शिवसेना (उबाठा) ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलील दी थी कि उसके बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।
भाषा
प्रचेता माधव
माधव

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