तृणमूल का ऋतब्रत नीत बागी गुट बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलेगा
तृणमूल का ऋतब्रत नीत बागी गुट बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलेगा
कोलकाता, एक जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई बुधवार को उस समय और तेज हो गई जब बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक के लिए समय प्राप्त किया।
वहीं, ममता बनर्जी नीत गुट ने पार्टी के नाम, कोष और ‘दो फूलों’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर बढ़ती खींचतान के बीच बागियों के पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के अधिकार पर सवाल उठाए।
ऋतब्रत बनर्जी नीत धड़े के नेताओं ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की अगुवाई में 10 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों से मुलाकात करेगा।
ऋतब्रत ने दिल्ली रवाना होने से पहले ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कल निर्वाचन आयोग के साथ हमारी मुलाकात निर्धारित है। तृणमूल कांग्रेस के 10 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलेगा।’’
बैठक का एजेंडा बताने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि हालिया संगठनात्मक कदमों के बाद धड़े ने निर्वाचन आयोग से बैठक का समय मांगा है।
ऋतब्रत बनर्जी नीत गुट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग के सामने दावा पेश कर सकता है कि वही ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है और उसे पार्टी की वैध संगठनात्मक और विधायी इकाई के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए।
बागी धड़े के एक नेता ने कहा कि वे यह दलील देंगे कि उन्हें पार्टी के अधिकतर संगठनात्मक पदाधिकारियों और निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल है, और इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनका जायज दावा है।
यह बैठक पार्टी के दोनों धड़ों के बीच झगड़े में सबसे नया और शायद सबसे अहम कदम है।
ऋतब्रत नीत बागी गुट ने गत सप्ताह कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ़्तर में दस्तावेज जमा कराए थे और अलग से निर्वाचन आयोग से संपर्क कर दावा किया था कि वह ही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस गुट ने खुद को ‘वास्तविक’ तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता देने की मांग की है और पार्टी के चुनाव चिह्न ‘दो फूल’ के साथ-साथ उसके संगठनात्मक ढांचे और कोष पर भी अपना दावा जताया है।
ममता बनर्जी नीत गुट ने हालांकि ऋतब्रत नीत गुट के निर्वाचन आयोग से प्रस्तावित बैठक को तूल नहीं दी।
ममता नीत गुट के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘यह बैठक पूरी तरह से बेतुकी है। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, आयोग के साथ बैठक के लिए भेजे गए पत्र में संबंधित दलों के पंजीकृत हस्ताक्षरकर्ता होने चाहिए। इनमें से कोई भी गद्दार (बागी तृणमूल नेता) पंजीकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। वे तृणमूल कांग्रेस की ओर से बैठक कैसे कर सकते हैं?’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस घटनाक्रम को कोई महत्व नहीं देते हैं।’’
ममता बनर्जी द्वारा 1998 में तृणमूल का गठन किया गया था और स्थापना के बाद पहली बार, पिछले महीने बागी गुट ने औपचारिक रूप से नेतृत्व के ढांचे को बदलने की कोशिश की। उन्होंने एक विशेष सत्र में वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना, ममता बनर्जी को हटा दिया और एक समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व का ढांचा पेश किया।
यह कदम तब उठाया गया जब पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया और पार्टी नेतृत्व के उम्मीदवार को नकार दिया। बागी गुट का अब दावा है कि उन्हें लगभग 65 विधायकों का समर्थन हासिल है।
तृणमूल कांग्रेस का यह संकट पार्टी के संसदीय दल तक पहुंच गया और लोकसभा में उसके 28 सदस्यों में से 20 ने ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय करने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को समर्थन देने की घोषणा की।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश

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