डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ पीड़िता का संघर्ष रंग लाया; उसी मेडिकल कॉलेज में पाई नौकरी

डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ पीड़िता का संघर्ष रंग लाया; उसी मेडिकल कॉलेज में पाई नौकरी

डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ पीड़िता का संघर्ष रंग लाया; उसी मेडिकल कॉलेज में पाई नौकरी
Modified Date: May 26, 2026 / 05:40 pm IST
Published Date: May 26, 2026 5:40 pm IST

कोझिकोड (केरल), 26 मई (भाषा) सर्जरी के दौरान पेट के अंदर कथित तौर पर एक सर्जिकल कैंची छोड़ने के मामले की पीड़ित महिला का न्याय पाने के लिए किया गया संघर्ष आखिरकार रंग लाया। हर्षिना ने मंगलवार को यहां उसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में कार्यालय परिचारिका के रूप में नियुक्ति पायी जहां सर्जरी के दौरान उनके साथ यह लापरवाही बरती गई थी।

राज्य में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने सत्ता में आने के तुरंत बाद उन्हें उसी मेडिकल कॉलेज में स्थायी नौकरी देने का फैसला किया और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार को उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा।

पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की आलोचना करते हुए हर्षिना ने आरोप लगाया कि तत्कालीन अधिकारियों ने बार-बार उनका साथ देने का दावा करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया और उनका मजाक उड़ाया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह उन पूर्व अधिकारियों को करारा जवाब है जिन्होंने हमारा साथ देने का दावा करते हुए हमें दरकिनार किया और अपमानित किया।’’

हर्षिना ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने उनसे किया वादा पूरा किया है और उन्हें अब भी उनसे वही स्नेह और समर्थन मिल रहा है जो उन्हें तब मिलता था, जब वह विपक्ष के नेता थे।

उन्होंने कहा कि अब उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का भी समर्थन प्राप्त है और आखिरकार सत्य की जीत हुई है।

हर्षिना ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अदालत में लड़ाई जारी रहेगी।

आरोप है कि 2017 में कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज में हुई एक सर्जरी के दौरान कैंची हर्षिना के पेट के अंदर ही रह गई थी, जिसे 2022 में एक अन्य ऑपरेशन के जरिए निकाला गया।

तब से हर्षिना न्याय और पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हुए एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


लेखक के बारे में