महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इलाहाबादिया की टिप्पणी पर एनसीडब्ल्यू से रिपोर्ट मांगेगा

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इलाहाबादिया की टिप्पणी पर एनसीडब्ल्यू से रिपोर्ट मांगेगा

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इलाहाबादिया की टिप्पणी पर एनसीडब्ल्यू से रिपोर्ट मांगेगा
Modified Date: February 11, 2025 / 05:40 pm IST
Published Date: February 11, 2025 5:40 pm IST

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रणवीर इलाहाबादिया की आपत्तिजनक टिप्पणी से पैदा हुए विवाद के बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मंगलवार को कहा कि उनका मंत्रालय इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से रिपोर्ट मांगेगा।

एनसीडब्ल्यू ने ‘ओवर-द-टॉप’ (ओटीटी) मंचों और सोशल मीडिया ‘स्ट्रीमिंग साइट’ पर अनुचित या अश्लील सामग्री अपलोड करने या ‘स्ट्रीमिंग’ से रोकने के संबंध में सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से सख्त दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वैष्णव को लिखे पत्र में एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस संबंध में तत्काल नियामकीय उपाय करने को कहा है।

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माता-पिता और यौन संबंधों पर रणवीर इलाहाबादिया द्वारा की गईं आपत्तिजनक टिप्पणियों की व्यापक पैमाने पर आलोचना हुई है।

इलाहाबादिया ने हास्य कलाकार समय रैना के यूट्यूब रियलिटी कार्यक्रम ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ में एक प्रतियोगी से उसके माता-पिता और यौन संबंधों को लेकर सवाल करते हुए एक विवादास्पद टिप्पणी की, जिसके कारण कई लोगों ने उनके ‘पॉडकास्ट’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है।

इलाहाबादिया के ‘एक्स’ पर छह लाख से अधिक, इंस्टाग्राम पर 45 लाख से अधिक ‘फॉलोअर’ और यूट्यूब चैनल पर 1.05 करोड़ ‘सब्सक्राइबर’ हैं। व्यापक पैमाने पर आलोचना होने के बाद यूट्यूबर इलाहाबादिया ने माफी मांगी और कहा कि उन्हें ‘कॉमेडी’ नहीं आती।

एनसीडब्ल्यू ने कहा कि ऐसी सामग्री, जो सभी उम्र के लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध है, ने समाज पर खासकर महिलाओं और बच्चों पर इसके नकारात्मक प्रभाव के बारे में चिंता बढ़ा दी है।

टिप्पणी के लिए पूछे जाने पर देवी ने कहा, ‘‘एनसीडब्ल्यू से रिपोर्ट मांगी जाएगी।’’

वैष्णव को लिखे अपने पत्र में, एनसीडब्ल्यू ने कई कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रकाश डाला, जिनमें महिलाओं का अभद्र चित्रण (निषेध) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम शामिल हैं।

एनसीडब्ल्यू ने कहा कि ऐसी सामग्री न केवल नुकसानदेह रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और सम्मान के लिए भी सीधा खतरा पैदा करती है।

एनसीडब्ल्यू ने मंत्री से सख्त दिशा-निर्देश जारी करके कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिससे ओटीटी मंचों को अनुचित या अश्लील सामग्री को स्ट्रीम करने या उपयोगकर्ताओं को अपलोड करने की अनुमति देने से रोका जा सके।

एनसीडब्ल्यू ने यह भी अनुरोध किया कि वैष्णव के मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई से आयोग को यथाशीघ्र अवगत कराया जाए ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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