दिल्ली में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग से 42.49 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में तीन गिरफ्तार

दिल्ली में 'डिजिटल अरेस्ट' कर बुजुर्ग से 42.49 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में तीन गिरफ्तार

दिल्ली में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग से 42.49 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में तीन गिरफ्तार
Modified Date: October 7, 2025 / 08:39 pm IST
Published Date: October 7, 2025 8:39 pm IST

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने 80 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 42.49 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की पहचान महेंद्र कुमार वैष्णव (37), विशाल कुमार (25) और श्याम दास (25) के रूप में हुई। सभी राजस्थान के निवासी हैं।

अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने कथित रूप से अपने बैंक खातों को एक साइबर सिंडिकेट के साथ साझा किया था, जिसने इन खातों के माध्यम से पीड़ितों के से वसूले गए धन का शोधन किया।

सिंडिकेट के सदस्य पीड़ितों को प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेष्ण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी बताकर फोन करते थे और उन पर संदिग्ध लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाते थे।

पीड़ित कथित तौर पर धोखाधड़ी का शिकार हुए कई लोगों में से एक था। पुलिस ने पीड़ित का नाम साझा नहीं किया।

पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) आदित्य गौतम ने एक बयान में कहा, ‘पीड़ित को घंटों तक लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया और मामले के कानूनी निपटारे और सत्यापन की आड़ में विभिन्न खातों में धन अंतरित करने के लिए मजबूर किया गया। धोखेबाजों ने बुजुर्ग की जीवन भर की बचत (42.49 लाख रुपये) उसके खाते से निकाल ली।’

जांच के दौरान पुलिस को सिंडिकेट से जुड़े आठ बैंक खातों का पता चला।

महेंद्र कुमार वैष्णव के नाम से संचालित प्राथमिक खातों में से एक में धोखाधड़ी से संबंधित धनराशि का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त हुआ।

जांच से पता चला कि महेंद्र और उसके सहयोगियों ने या तो अपने बैंक खाते साइबर सिंडिकेट को बेच दिए थे या फिर उन्हें किराये पर दे दिया था।

गौतम ने कहा, ‘सिंडिकेट की ओर से वित्तीय लेनदेन की सुविधा के लिए उन्हें हर महीने प्रति खाता लगभग 10,000 रुपये का भुगतान किया जाता था।’

आरोपियों ने चेक बुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी अपने साइबर सिंडिकेट के संचालकों को सौंप दी, जिससे धोखेबाजों को पूरे भारत में धन का लेन-देन करने और पकड़े जाने से बचने में मदद मिली।

इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप


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